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7pay - Copyसातवें वेतन आयोग की मुख्‍य सिफारिशें निम्नानुसार है जिन पर सरकार को विचार विमर्श करके लागु करना है:

क्रियान्वफयन की अनुमोदित तिथि : 01.01.2016

न्यूनतम वेतन: अधिकतम वेतन 2,25,000 रुपये प्रतिमाह और सामान्यआ वेतन स्तर मौजूदा रूप में कैबिनेट सचिव तथा अन्यअ लोगों का प्रतिमाह वेतन 2,50,000 रुपये।

वित्तीय अनुमान: वित्ती वर्ष 2016-17 में होने वाला कुल वित्तीपय प्रभाव इस प्रकार होने की संभावना है- ‘बिजनेस एज यूजूअल’ के आधार पर होने वाला खर्च 1,02,100 करोड़ रुपये। इसके अनुसार वेतन में 39,100 करोड़ रुपये का इजाफा, भत्तों0 में 29,300 करोड़ रुपये का इजाफा और पेंशन में 33,700 करोड़ रुपये का इजाफा संभावित।

कुल वित्ती,य प्रभाव में से 1,02,100 करोड़ रूपये और 73,650 करोड़ रुपये आम बजट द्वारा तथा 28,450 करोड़ रूपये रेलवे बजट द्वारा वहन किया जाएगा। ‘बिजनेस एज यूजूअल’ के मद्देनजर वेतन, भत्ते और पेंशन की कुल बढोत्तररी 23.55 प्रतिशत होगी। इसके दायरे में वेतन में 16 प्रतिशत, भत्तों में 63 प्रतिशत और पेंशन में 24 प्रतिशत का इजाफा होगा।

आयोग के सिफारिशों के अनुरूप कुल प्रभाव छठवें वेतन आयोग के मामले में 0.77 प्रतिशत के मुकाबले सकल घरेलू उत्पारद के मद्देनजर वेतन, भत्तेत और पेंशन के आधार पर कुल खर्च के अनुपात में 0.65 प्रतिशत प्वावइंट का इजाफा संभावित है।

नया वेतन ढांचा : ग्रेड वेतन ढांचे से संबंधित मुद्दों पर विचार करते हुए और पे-बैंड और ग्रेड-पे की मौजूदा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के दृष्टिंकोण से उनके संबंध में नया वेतन ढांचा तैयार किया गया है। ग्रेड-पे को पे-मेट्रिक्सि में शामिल किया गया है। कर्मचारी की स्थिलति को अब तक ग्रेड-पे के आधार पर तय किया जाता था, अब उसे पे-मेट्रिक्सग के स्तीर पर तय किया जाएगा।

निर्धारण : सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू होने वाले निर्धारण नियोग को 2.57 करने का प्रस्ता व है।

वार्षिक वेतन वृद्धि : वार्षिक वेतन वृद्धि की दर 3 प्रतिशत बरकरार रखी गई है।

संशोधित निश्चिृत पदोन्न्ति (एमएसीपी) :
एमएसीपी के तहत कामकाज के नियम कड़े किए गए हैं। अब उन्हें ‘अच्छाश’ से ‘बहुत अच्छाप’ किया गया है।
आयोग ने यह सिफारिश भी की है कि वार्षिक वेतन वृद्धि उन कर्मचारियों को नहीं दी जाए जो एमएसीपी की शर्तों के अनुरूप काम करने में सक्षम नहीं हैं या अपने सेवा काल के पहले 20 वर्षों के दौरान नियमित पदोन्नकति के योग्यन नहीं पाए गए हैं।

एमएसीपी में अन्य बदलावों की सिफारिश नहीं की गई है।

सैन्यप सेवा वेतन (एमएसपी) :
एमएसपी केवल रक्षा बलों के कर्मियों पर भी लागू होगी। इसके पहले ब्रिगेडियर और उनके समकक्ष पदों के संबंध में एमएसपी लागू होगी। मौजूदा मासिक एमएसपी और अनुमोदित संशोधित दरें इस प्रकार हैं :- 

मौजूदा प्रस्तावित
i. Service Officers Rs.6,000 Rs.15,500
ii. Nursing Officers Rs.4,200 Rs.10,800
iii. JCO/ORs Rs.2,000 Rs.  5,200
iv. Non Combatants (Enrolled) in the Air Force Rs.1,000 Rs.  3,600

 

अल्प सेवा कमीशन अधिकारी : अल्प सेवा कमीशन अधिकारियों को 7 और 10 वर्षों के सेवा काल के बीच कभी भी सशस्त्रअ बल छोड़ने की अनुमति होगी। इस पर उन्हेंर साढ़े दस महीनों के बराबर ग्रेच्यू टी मिलेगी। उन्हें किसी भी प्रतिष्ठि त संस्थांन में एक वर्ष का कार्यकारी कार्यक्रम या एमटेक कार्यक्रम करने के लिए धनराशि दी जाएगी।

लेटरल एंट्री / सेटलमेंट : सशस्त्री बल कर्मियों की लेटरल एंट्री / सेटलमेंट के लिए आयोग एक संशोधित प्रणाली की सिफारिश कर रहा है, ताकि इन कर्मियों को अन्यक संगठनों में समायोजित किया जा सके। सीएपीएफ में लेटरल एंट्री के लिए एक आकर्षक पैकेज अनुमोदित किया गया है।

मुख्याालयों/फील्डट में तैनात अमले में समानता : सहायकों और स्टेकनों जैसे समान पद पर मुख्याालय और फील्डल में काम करने वाले कर्मियों के संबंध में समानता।

संवर्ग समीक्षा: समूह ‘ए’ के अधिकारियों के लिए संवर्ग प्रक्रिया में व्यरवस्थिनत परिवर्तन।

भत्तेग: आयोग ने 52 भत्तोंक को समाप्त् करने की सिफारिश की है। अन्य 36 भत्तेा भी अलग पहचान के आधार पर समाप्त् कर दिए गए हैं, लेकिन या तो उन्हेंग मौजूदा भत्तों में या नए प्रस्ताेवित भत्तों में शामिल किया गया है। जोखिम और कठिनाई से संबंधित भत्तों को प्रस्ताेवित जोखिम एवं कठिनाई मेट्रिक्सय के अधीन किया गया है।
मौजूदा मासिक सियाचिन भत्तें और अनुमोदित संशोधित दरें इस प्रकार हैं:-

मौजूदा  प्रस्तामवित
i. Service Officers Rs.21,000 Rs.31,500
iii. JCO/ORs Rs.14,000 Rs.21,000

यह जोखिम/कठिनाई भत्ते‍ की अंतिम सीमा है और इस भत्तेा से अधिक रकम वाली कोई भी व्यजक्तिठगत आरएचए देय नहीं होगा।

मकान भाड़ा भत्ताि (HRA) : क्यों कि मूल वेतन को बढ़ाकर संशोधित किया गया है, इसलिए आयोग ने सिफारिश की है कि वर्ग ‘एक्स)’, ‘वाई’ और ‘जेड’ शहरों के लिए नये मूल वेतन के संबंध में एचआरए क्रमश: 24 प्रतिशत,16 प्रतिशत और 08 प्रतिशत की दर से देय होगा। आयोग ने यह सिफारिश भी की है कि जब महंगाई भत्तात 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा, तब एचआरए की संशोधित दर क्रमश: 27 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 09 प्रतिशत होगी। इसके साथ ही जब महंगाई भत्ता 100 प्रतिशत के पार हो जाएगा तो संशोधित दर क्रमश: 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हो जाएगी।

सशस्त्रज बल, सीएपीएफ और भारतीय तटरक्षक बल के पीबीओआर को मिलने वाला एचआरए अभी तक विवाहित स्थि्ति में ही प्राप्तभ होता था। इस प्रकार कई लोग वंचित रह जाते थे। अब एचआरए के दायरे में सभी को रखा गया है।

रिपोर्ट में जिन भत्तों का उल्ले ख नहीं है, वे समाप्तं माने जाएंगे।

भत्तोंट का दावा करने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया है।

अग्रिम : बिना ब्याेज वाले सभी अग्रिमों को समाप्तल कर दिया गया है।
केवल व्याक्तिागत कम्यूको टर अग्रिम और भवन निर्माण अग्रिम संबंधी ब्याकज वाले अग्रिमों को कायम रखा गया है। भवन निर्माण अग्रिम की धनराशि मौजूदा 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है।

सरकारी कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना (सीजीईजीआईएस) : सीजीईजीआईएस के तहत बीमा कवरेज के लिए योगदान की दर बहुत समय से अपरिवर्तित रही है। उन्हें अब बढ़ाया गया है। सीजीईजीआईएस की निम्नकलिखित दरों की सिफारिश की गई है:

 

  मौजूदा प्रस्ताआवित
कर्मचारी की श्रेणी मासिक कटौती

 (Rs.)

बीमा रकम

 (Rs.)

मासिक कटौती

 (Rs.)

बीमा रकम

 (Rs.)

10 and above 120 1,20,000 5000 50,00,000
6 to 9 60 60,000 2500 25,00,000
1 to 5 30 30,000 1500 15,00,000

 

 

चिकित्सा0 सुविधा :
केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों के लिए स्वाहस्य् भ बीमा योजना शुरू करने की सिफारिश की गई है। सीजीएचएस क्षेत्र के बाहर रहने वाले पेंशनधारियों के लाभ के लिए सीजीएचएस को उन अस्पीतालों को अनुबंधित करना चाहिए जो पहले से सीएस (एमए)/ईसीएचएस के अंतर्गत अनुबंधित हैं, ताकि इन पेंशनधारियों को गैर-नकदी आधार पर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
सभी पोस्टकल पेंशनधारी सीजीएचएस के दायरे में रखे जाएं। सभी पोस्टनल डिस्पेंीसरियों को सीजीएचएस में शामिल किया जाए।

पेंशन: आयोग ने 01 जनवरी, 2016 से पहले सेवानिवृत्ती होने वाले सीपीएएफ और रक्षा कर्मियों सहित सभी सिविल कर्मचारियों की संशोधित पेंशन प्रणाली की सिफारिश की है। इसे पूर्व के पेंशनधारियों और वर्तमान में अवकाश प्राप्तर करने वाले कर्मचारियों की पेंशन में समानता लाई जाएगी जिनका सेवा काल और वेतनमान तथा सेवानिवृत्तिी की अवधि समान हो।
पूर्व के पेंशनधारियों की पेंशन पे-बैंड और ग्रेड-पे के बारे में आयोग द्वारा अनुमोदित पे-मेट्रिक्सए पर तय होगी। यह इन्हीं पे-बैंड और ग्रेड-पे और सेवानिवृत्तिव के आधार पर तय किया जाएगा।
यह रकम अवकाश प्राप्तं करने वाले व्यडक्तितयों के अनुमानित वेतन के आधार पर होगी। इसके तहत वेतन वृद्धि को 03 प्रतिशत की दर से सेवा काल के स्तंर पर जोड़ा जाएगा।
सशस्त्रन बलों के कर्मियों के मामले में यह रकम योग्यकता अनुसार सेना सेवा वेतन में शामिल होगी।
कुल रकम का 50 प्रतिशत नई पेंशन का आधार बनाया जाएगा।
एक वैकल्पि क हिसाब तैयार किया जाएगा जो मौजूदा मूल पेंशन के लिए 2.57 गुना होगा।
पेंशनधारी को दोनों में से जो अधिक होगा, वह प्रदान किया जाएगा।

ग्रेच्यूीटी : ग्रेच्यूगटी की अधिकतम सीमा को मौजूदा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख किया जाएगा। जब भी महंगाई भत्ताट 50 प्रतिशत बढ़ेगा, ग्रेच्यू.टी की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएगी।

सशस्त्रह बलों के लिए निशक्तरता पेंशन : आयोग मौजूदा परसेंटाईल आधारित निशक्तकता पेंशन प्रणाली के स्थालन पर एक स्लैंब आधारित निशक्तमता पेंशन प्रणाली की सिफारिश कर रहा है।

निकटवर्ती रिश्ते दार को एकमुश्तक अनुकम्पाा क्षतिपूर्ति: आयोग मृतक के निकटवर्ती रिश्ते्दार को एकमुश्तत अनुकम्पाद क्षतिपूर्ति की दर को संशोधित करने की सिफारिश कर रहा है। यह प्रणाली कर्तव्यरपालन के दौरान विभिन्नत परिस्थिकतियों में मृत्युश होने पर देय होगी। यह प्रणाली सीएपीएफ कर्मियों सहित सशस्त्रन बलों के कर्मियों के संबंध में समान रूप से लागू होगी।

सीएपीएफ कर्मियों को शहीद का दर्जा: आयोग का मानना है कि रक्षा बल कर्मियों के समान स्तपर पर भी कर्तव्यज पालन के दौरान यदि सीएपीएफ के कर्मियों की मृत्यु होती है, तो उन्हेंे शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए।

नई पेंशन प्रणाली : कमीशन को नई पेंशन प्रणाली के संबंध में कई शिकायतें मिली थीं। इसे दुरूस्तन करने के लिए कई सिफारिशें की गई हैं। शिकायतों को हल करने के लिए एक मजबूत प्रणाली बनाने की सिफारिश की गई है।

नियामक संस्थान : आयोग ने सिफारिश की है कि चयनित नियामक संस्थाननों के अध्यरक्षों और सदस्योंस के लिए क्रमश: 4,50,000 रूपये और 4,00,000 रूपये प्रतिमाह एक समेकित वेतन पैकेज तय किया जाए। सेवानिवृत्तफ सरकारी कर्मियों के मामले में उनकी पेंशन को उनके समेकित वेतन से नहीं काटा जाएगा। जब भी महंगाई भत्तार 50 प्रतिशत तक हो जाएगा, तो समेकित वेतन पैकेज में 25 प्रतिशत का इजाफा किया जाएगा। शेष नियामक संस्था नों के सदस्योंव के लिए सामान्य। प्रतिस्था पन वेतन की सिफारिश की गई है।

कामकाज आधारित वेतन : आयोग ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के सभी वर्गों के लिए कामकाज आधारित वेतन (पीआरपी) की सिफारिश की है। इसका आधार संशोधित वार्षिक कामकाज संबंधी रिपोर्टों और अन्यर विस्तृकत दिशा-निर्देशों के मद्देनजर ‘रिजल्ट्स फ्रेमवर्क डॉक्यू मेंट’ है।
आयोग की कुछ सिफारिशें इस प्रकार हैं, जिन पर दृष्टििकोण संबंधी सहमति नहीं हो सकी थी-

बढ़त (एज) : यह बढ़त मौजूदा रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय विदेश सेवा के संबंध में मौजूद है, जो पदोन्नौति के तीन चरणों से संबंधित है। यह पदोन्नेति एसटीएस, जेएजी और एनएफएसजी के विषय में है। आयोग अध्योक्ष ने सिफारिश की थी कि इसके दायरे में भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा को भी लाया जाए।
आयोग के सदस्यस श्री विवेक राय का मानना था कि वित्तीशय बढ़त भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय विदेश सेवा के लिए ही न्यााय संगत है। आयोग के सदस्य़ डॉ. रथिन रॉय का विचार था कि आईएएस और आईएफएस को मिलने वाली वित्तीसय बढ़त को हटा दिया जाए।

मनोनयन : आयोग के अध्यिक्ष एवं सदस्यै डॉ. रथिन रॉय ने सिफारिश की थी कि जिन अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों और केंद्रीय सेवा समूह ‘ए’ अधिकारियों ने सेवा के 17 साल पूरे कर लिए हों, उन्हेंक आईएएस अधिकारियों सहित ‘दो वर्षीय बढ़त’ को समाप्ता करके सेंट्रल स्टाकफिंग स्कीहम में मनोनयन के लिए योग्यए माना जाए। आयोग के सदस्य् श्री विवेक राय इस विचार से सहमत नहीं थे और उन्होंोने सिफारिश की थी कि सेंट्रल स्टायफिंग स्कीकम की समीक्षा की जाए।

संगठित समूह ‘ए’ सेवाओं के लिए गैर-क्रियाशील उन्नटयन : आयोग के अध्यमक्ष का विचार था कि संगठित समूह ‘ए’ सेवाओं द्वारा प्राप्त् एनएफयू को कायम रखा जाए तथा उसके दायरे में सीएपीएफ, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा बलों को भी शामिल किया जाए। सदस्या श्री विवेक राय और डॉ. रथिन रॉय ने सीएजी और एचएजी स्तंर पर एनएफयू को समाप्तस करने की सिफारिश की थी।

सेवानिवृत्तिी : आयोग के अध्य्क्ष और सदस्यत डॉ. रथिन रॉय ने सिफारिश की थी कि सभी सीएपीएफ कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु समान रूप से 60 वर्ष हो। आयोग के सदस्यॉ श्री विवेक राय इस सिफारिश से सहमत नहीं थे और उन्हों ने गृह मंत्रालय के कदम का अनुमोदन किया।


Source: http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=131719

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