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छोटे करदाताओं और अन्‍य के लिए कर में कुछ राहत की घोषणा 

Section 87A of Income Tax Act के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक की आय वाले व्‍यक्तियों पर कर का बोझ कम करने के लिए कर छूट की अधिकतम सीमा Rs.2000 से बढ़ाकर Rs.5000 करने का प्रस्‍ताव किया गया है। उन्‍होंने कहा कि इससे दो करोड़ से अधिक करदाताओं को Rs.3000 की राहत मिलेगी।

Section 80GG के अंतर्गत मकान किराए के भुगतान के संबंध में कटौती की सीमा Rs.24,000 प्रतिवर्ष से बढ़ाकर Rs.60,000 प्रतिवर्ष की गई है, जिससे किराए के मकानों में रहने वाले व्‍यक्तियों को राहत मिलेगी।

Section 44AD of the Income tax Act के अंतर्गत अनुमानित कराधान योजना (Presumptive Taxation Scheme) के तहत Turnover या सकल प्राप्तियों को मौजूदा Rs. 1 crore से बढ़ाकर Rs.2 crore की गई है, जिसका लाभ लगभग 33 लाख छोटे व्‍यवसायियों को मिलेगा। इससे सूक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्‍यक्तियों को विस्‍तृत बही खातों के रख-रखाव और उनकी Tax Audit कराने के बोझ से मुक्ति मिलेगी।

अनुमानित कराधान योजना (Presumptive Taxation Scheme) को ऐसे Professionals त‍क बढ़ाया जाएगा, जिनकी अनुमानित 50% की प्राप्तियों के साथ सकल प्राप्तियां Rs.50 लाख की हैं।

 

प्रथम बार घर खरीदने वालों के लिए प्रतिवर्ष 50,000 रुपए के अतिरिक्‍त ब्‍याज की कटौती

सस्‍ते आवास निर्माण को बढ़ावा देने के उपाय के तहत, वित्‍त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना समयबद्ध तरीके से सभी और विशेषकर गरीबों की आवासीय जरूरतों का समाधान करने के लिए सरकार के आश्‍वासन का साकार रूप है। उन्‍होंने कहा कि जून, 2016 से मार्च 2019 तक अनुमोदित किए जाने वाले और अनुमोदन के तीन वर्ष के भीतर चार मेट्रो शहरों में निर्मित किए जाने वाले 30 वर्ग मीटर के फ्लैटों और अन्‍य शहरों में 60 वर्गमीटर तक के फ्लैटों हेतु आवास निर्माण परियोजना शुरू करने वाले उपक्रमों को लाभों से सौ प्रतिशत कटौती देने का प्रस्‍ताव किया। हालांकि इन उपक्रमों पर न्‍यूनतम एकांतर कर लागू होगा। पहली बार मकान खरीदने वालों के लिए वित्‍त मंत्री ने अगले वित्‍त वर्ष के दौरान स्‍वीकृत 35 लाख रुपये तक के ऋणों हेतु 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष के अतिरिक्‍त ब्‍याज के लिए कटौती देने का प्रस्‍ताव किया, बशर्ते मकान की कीमत 50 लाख रुपये से ज्‍यादा न हो। उन्‍होंने कहा कि सरकारी निजी भागीदारी वाली स्‍कीमों सहित केन्‍द्रीय या राज्‍य सरकार की किसी स्‍कीम के तहत 60 वर्गमीटर तक के क्षेत्र में सस्‍ते मकानों के निर्माण को सेवा कर से छूट दी जाएगी।

 

अनुपालन विंडो (Compliance Window) में 45% कर का भुगतान कर अघोषित आय (Undisclosed Income) घोषित करने की योजना 
श्री जेटली ने अघोषित आय या परिसंपत्ति के रूप में प्रस्‍तुत आय घोषित करने के लिए घरेलू करदाताओं हेतु सीमित अवधि अनुपालन विंडो (Compliance Window) का प्रस्‍ताव किया। इसमें 30% की दर से कर और 7.5% की दर से अधिभार (Surcharge) तथा 7.5 % की दर से दंड (Penalty) शामिल है, जो अघोषित आय का कुल 45% होता है। आयकर अधिनियम (Income Tax Act) अ थवा संपत्ति कर अधिनियम (Wealth Tax Act) के तहत इन विवरणों में घोषित आय के संबंध में कोई छान-बीन या जांच नहीं होगी और घोषणा करने वाला अभियोजन (Prosecution) से मुक्‍त होगा। शर्तों के अधीन बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम 1988 (Benami Transaction (Prohibition) Act, 1988) से भी छूट देने का प्रस्‍ताव किया गया है।

अघोषित आय का 7.5% की दर पर लगाए गए Surcharge को ‘कृषि कल्‍याण अधिभार’ (Krishi Kalyan Surcharge) कहा जाएगा, जिसका कृषि और ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था के लिए उपयोग किया जाएगा। भारत सरकार की 1 जून से 30 सितंबर 2016 तक चलने वाली इस आय खुलासा योजना के तहत, घोषणा के दो महीने के अंदर देय राशि अदा करने के विकल्‍प के साथ नई विंडो खोलने की योजना है। एक बार छिपाई गई आय घोषित करने का अवसर देने के बाद वे कालाधन रखने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए समस्‍त संसाधन लगा देंगे।

 

कराधान को सरल एवं तर्कसंगत बनाना 
केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज लोकसभा में आम बजट 2016-17 पेश करते हुए कहा कि सरकार ने कर प्रशासन सुधार समिति की अनेक सिफारिशों को पहले ही स्‍वीकार कर लिया है। उन्‍होंने बजट 2016-17 में न्‍यायमूर्ति ईश्‍वर समिति की कई सिफारिशों को स्‍वीकार करने का भी प्रस्‍ताव किया।

करों की बहुलता (Multiplicity of Taxes), इससे जुड़े प्रतिकूल असर और संग्रह की लागत घटाने के लिए विभिन्‍न मंत्रालयों द्वारा लागू किये गये उन 13 उपकरों (Cess) को समाप्‍त करने का प्रस्‍ताव किया गया है, जिनमें वार्षिक राजस्‍व संग्रह Rs.50 crore से भी कम रहता है।

आयकर के TDS (स्रोत पर कर कटौती) प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने के उपायों का प्रस्‍ताव किया गया है, ताकि उन छोटे करदाताओं के पास नकदी प्रवाह की स्थिति सुधर सके जिनकी राशि मौजूदा TDS प्रावधानों के कारण अटक जाती है।

विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उपाय के अंतर्गत, श्री जेटली ने कहा कि आयकर अधिनियम में उपबंधित त्‍वरित अवमूल्‍यन (accelerated depreciation) को 1 अप्रैल 2017 से अधिकतम 40% तक सीमित कर दिया जाएगा। अनुसंधान (Research) कार्य हेतु कटौतियों के लाभ 1 अप्रैल, 2017 से अधिकतम 150% और 1 अप्रैल 2020 से अधिकतम 100% तक कर दिए जाएंगे।

उन्‍होंने कहा कि कारपोरेट कर-दर में कटौती को चरणबद्ध रूप से समाप्‍त किए जा रहे प्रोत्‍साहनों से मिलने वाले प्रत्‍याशित अतिरिक्‍त राज्‍स्‍व के अनुसार निर्धारित किया जाना है। उन्‍होंने 1 मार्च 2016 को या इसके बाद निगमित होने वाली नई विनिर्माणकारी कंपनियों को 25 प्रतिशत +अधिभार और उपकर की दर से कराधान का विकल्‍प उपलब्‍ध कराने का प्रस्‍ताव किया यदि वे लाभ संबद्ध या निवेश संबद्ध कटौतियों का दावा नहीं करती तथा निवेश छूट और त्‍वरित अवमूल्‍यन का लाभ नहीं उठाती। श्री जेटली ने कहा कि अपेक्षाकृत छोटे उदयमों अर्थात ऐसी कंपनियां जिनका टर्नओवर 5 करोड़़ रूपए से अधिक न हो (मार्च 2015 को समाप्‍त वित्‍त वर्ष के दौरान) उनके लिए आगामी वित्‍त वर्ष के दौरान कारपोरेट की दर को घटाकर 29 प्रतिशत + अधिभार और उपकर किया जाए।

 

पेंशन-प्राप्‍त समाज की दिशा में बढ़ने के लिए उपाय 

केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज लोकसभा में आम बजट 2016-17 पेश करते हुए कहा कि Pension Schemes वरिष्‍ठ ना‍गरिकों (Senior Citizens) को वित्‍तीय सुरक्षा की पेशकश करती हैं। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय पेंशन स्‍कीम (NPS) के मामले में सेवानिवृत्ति के समय संबंधित निधि के 40% तक की निकासी को कर मुक्‍त (Exempt) करने का प्रस्‍ताव किया है। इसी तरह अधिवर्षिता निधियों (superannuation funds) और EPF सहित मान्‍यता प्राप्‍त भविष्‍य निधियों (Recognized Provident Funds) के मामले में, 01 अप्रैल 2016 के बाद किये जाने वाले अंशदानों से सृजित निधि के संबंध में भी निधि के 40% के कर मुक्‍त (Tax Exempt) होने का समान मानदण्‍ड लागू होगा। इसके अतिरिक्‍त, पेंशनभोगी की मृत्‍यु के पश्‍चात उसके कानूनी उत्‍तराधिकारी को मिलने वाली वार्षिकी निधि इन तीनों ही मामलों में कर योग्‍य नहीं मानी जाएगी।

उन्‍होंने कर छूट का लाभ लेने के लिए मान्‍यता प्राप्‍त भविष्‍य (Recognized Provident Funds) और अधिवर्षिता निधियों (superannuation funds) में नियोक्‍ता के अंशदान की मौद्रिक सीमा को प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये करने का भी प्रस्‍ताव किया है।

उन्‍होंने राष्‍ट्रीय पेंशन स्‍कीम (NPS) द्वारा उपलब्‍ध कराई जाने वाली वार्षिकी (Annuity) सेवाओं और EPFO द्वारा कर्मचारियों को मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं को सेवा कर से छूट देने का प्रस्‍ताव किया है। इसके अलावा, उन्‍होंने कुछ मामलों में एकल प्रीमियम वार्षिकी (बीमा) पॉलिसियों पर सेवा कर को अदा किये गये प्रीमियम के 3.5 प्रतिशत से घटाकर 1.4 प्रतिशत करने का भी प्रस्‍ताव किया है।

 

स्‍टार्टअप (Startup) के लिए कुल 5 वर्षो में से 3 वर्षो तक अर्जित किए गये मुनाफे पर 100 प्रतिशत कर कटौती का लाभ

श्री अरुण जेटली ने कहा कि Startup व्‍यवसाय रोजगार सृजित करते हैं, नवोन्‍मेष लाते हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि मेक इन इंडिया कार्यक्रम में ये प्रमुख भूमिका निभाएंगे। वित्‍त मंत्री ने अप्रैल 2016 से मार्च 2019 के दौरान, प्रचालन आरंभ करने वाले Startup को पांच वर्षों में से तीन वर्षों तक अर्जित किए गए लाभ पर सौ प्रतिशत कर कटौती का लाभ देकर व्‍यवसाय को बढ़ावा देने में मदद का प्रस्‍ताव दिया। उन्‍होंने कहा कि ऐसे मामलों में न्‍यूनतम एकांतर कर (MAT) लागू होगा। पूंजी लाभ पर कर नहीं लगाया जाएगा। यदि विनियमि‍त/अधिसूचित निधियों में निवेश किया गया हो और यदि व्‍यक्तियों द्वारा ऐसे अधिसूचित स्‍टार्ट अप में निवेश किया गया हो, जिनमें उनकी अधिसंख्‍य शेयरधारिता हो।

 

Make In India

वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि सीमा एवं उत्‍पाद शुल्‍क से जुड़ा ढांचा ‘मेक इन इंडिया’अभियान की दिशा में घरेलू मूल्‍यवर्धन को प्रोत्‍साहित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्‍होंने अनेक खास कच्‍चे माल, मध्‍यवर्ती वस्‍तुओं एवं कलपुर्जों और कुछ अन्‍य विशेष वस्‍तुओं पर देय सीमा एवं उत्‍पाद शुल्‍क में उपयुक्‍त बदलाव करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रस्‍ताव किया है, ताकि विभिन्‍न क्षेत्रों में घरेलू उद्योग की लागत घटाई जा सके और प्रतिस्‍पर्धी क्षमता बेहतर की जा सके। इन क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर, पूंजीगत सामान, रक्षा उत्‍पादन, कपड़ा, खनिज ईंधन एवं खनिज तेल, रसायन व पेट्रोरसायन, कागज, पेपरबोर्ड व न्‍यूजप्रिंट, विमानों का रख-रखाव व मरम्‍मत, जहाज मरम्‍मत इत्‍यादि शामिल हैं।

 

अवसंरचना उपकर (Infrastructure Cess)

देश में शहरों में प्रदूषण और यातायात की स्थिति के मद्देनजर वित्‍तमंत्री ने पेट्रोल, एलपीजी, सीएनजी की छोटी कारों पर 1%, कतिपय क्षमता वाली डीजल कारों पर 2.5% और अधिक इंजन क्षमता वाले अन्‍य वाहनों और SUV पर 4% Infrastructure Cess लगाने का प्रस्‍ताव रखा। तंबाकू और तंबाकू उत्‍पादों के सेवन को हतोत्‍साहित करने के लिए श्री जेटली ने बीड़ी के अतिरिक्‍त अन्‍य तंबाकू उत्‍पादों पर उत्‍पाद शुल्‍क 10 से 15 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्‍ताव किया। उन्‍होंने वित्‍त अधिनियम 1994 में संशोधन का प्रस्‍ताव किया।

 

Clean Environment Cess

वित्‍त मंत्री ने कोयला, लिग्‍नाइट और पीट पर लगाए गए ‘Clean Energy Cess’ को ‘Clean Environment Cess’ का नया नाम दिया और उसकी दर Rs.200 प्रति टन से बढ़ाकर Rs.400 प्रति टन करने की घोषणा की। तंबाकू और तंबाकू उत्‍पादों की खपत को हत्‍तोत्‍साहित करने के लिए उन्‍होंने बीड़ी को छोड़कर विभिन्‍न तंबाकू उत्‍पादों पर उत्‍पाद शुल्‍क लगभग 10% से 15% तक बढ़ाने की घोषणा की।

 

नई ‘विवाद निपटान योजना’ (Dispute Resolution Scheme) के जरिए कर अनुकूल प्रणाली को बढ़ावा देना 

लोकसभा में आज आम बजट 2016-17 प्रस्‍तुत करते हुए वित्‍तमंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि मुकदमेबाजी किसी भी कर अनुकूल प्रणाली के लिए नुकसानदायक होती है और अविश्‍वास का माहौल पैदा करती है। मुकदमेबाजी से करदाताओं की अनुपालन लागत और सरकार की प्रशासनिक लागत भी बढ़ती है। प्रथम अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष कर संबंधी लगभग 3 लाख मामले लंबित पड़े हैं, जिनकी विवादित राशि 5.5 लाख करोड़ रुपये है। इनकी संख्‍या को कम करने के उद्देश्‍य से नई विवाद निपटान योजना (Dispute Resolution Scheme) का शुभारंभ किया गया है। Dispute Resolution Scheme की विशेषताएं निम्‍नलिखित हैं –

• कोई करदाता, जिसकी आज की तारीख में आयुक्‍त (अपील) के समक्ष कोई अपील लंबित है, वह निर्धा‍रण तिथि तक विवादित कर तथा ब्‍याज का भुगतान करके अपने मामले का निपटान कर सकता है।

• 10 लाख रुपये तक के विवादित आयकर के मामलों में कोई आर्थिक दंड (Penalty) नहीं लगाया जाएगा।

• 10 लाख रुपये से अधिक के विवादित कर के मामलों पर प्रत्‍यक्ष (Direct Tax) और अप्रत्‍यक्ष कर (Indirect Tax) के लिए न्‍यूनतम अर्थदंड का केवल 25% दंड लगाया जाएगा।

• अर्थदंड के आदेश के विरुद्ध किसी भी लंबित अपील को न्‍यूनतम अर्थदंड का 25% का भुगतान करके निपटाया जा सकता है।

• विशिष्‍ट अधिनियमों के अंतर्गत जिन व्‍यक्तियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनके साथ कुछ श्रेणी के व्‍यक्ति इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे।

सरकार पूर्व प्रभाव (Retrospectively) से नई करदेयता सृजित नहीं करेगी, यह आश्‍वासन देते हुए वित्‍तमंत्री श्री अरुण जेटली ने स्थिर और सरल कर प्रणाली की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्‍होंने पूर्व प्रभावी संशोधन के तहत चल रहे मामलों को एक बार में निपटाने के लिए ‘Dispute Resolution Scheme’ का प्रस्‍ताव रखा, जिसमें अगर कोई BIPA सहित किसी न्‍यायालय अथवा अधिकरण में लंबित मामले या किसी मध्‍यस्‍थता में कार्रवाई को वापस लेने पर सहमति व्‍यक्‍त करें तो वह केवल बकाया कर का भुगतान कर अपना मामला निपटा सकता है। श्री जेटली ने आर्थिक अपराधों की विभिन्‍न श्रेणियों के साथ दंड की राशि का निर्धारण करके संपूर्ण दंड प्रणाली में संशोधन करने और इस प्रकार कर अधिकारियों के अधिकारों को काफी हद तक कम करने का प्रस्‍ताव किया। अब आय को कम दर्शाने के मामले में कर का 50% और तथ्‍यों को गलत तरीके से प्रस्‍तुत करने के मामले में कर का 200% अर्थदंड दर होगी। कर अदा किया गया हो और अपील दायर नहीं की गई हो, ऐसी विशेष परिस्थितियों में दंड माफी का भी प्रस्‍ताव किया गया है।

दूसरा मुद्दा जिसके कारण विवादों की संख्‍या में बढ़ोतरी हुई है, वह है Section 14A of the Income Tax Act के तहत छूट प्राप्‍त आय से संबंधित व्‍यय की अस्‍वीकृति की संख्‍या। इसलिए Rule 8D को तर्कसंगत बनाने का भी प्रस्‍ताव किया गया है।

[केंद्रीय बजट 2016-17 के मुख्य बिंदु Highlights of Union Budget 2016-17 in Hindi]