वस्तु एवं सेवा कर (GST)  जी.एस.टी. में मूल्यांकन (Valuation in GST)

प्र 1. जी.एस.टी. करारोपण के लिए कराधीन आपूर्ति का अपनाये जाने वाला मूल्य क्या होता है?

उत्तरः वस्तुओं और सेवाओं की कराधीन आपूर्ति का मूल्य आमतौर पर ‘लेनदेन का मूल्य‘ होगा जिस मूल्य पर वास्तव मे भुगतान किया गया है या देय है, जब पार्टियां संबंधित नहीं हैं और कीमत एकमात्र प्रतिफल है। एमजीएल इसके आगे विभिन्न लेनदेन मूल्य के दायरे से संबंधित समावेशन और बहिष्करण स्पष्ट करता है। उदाहरण के लिए, लेनदेन के मूल्य में वापस/रिफंड जमा, आपूर्ति से पहले या आपूर्ति के समय पर छूट की अनुमति शामिल नहीं की जाएगी।

प्र 2. लेनदेन मूल्य क्या है?

उत्तरः लेनदेन मूल्य वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति की वास्तव में भुगतान की गई या देय उस मूल्य को संदर्भित करता है जहां आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता आपस में संबंधित नहीं हैं और केवल कीमत आपूर्ति का एकमात्र प्रतिफल है। इसमें कोई भी राशि शामिल हो सकती है जिसके भुगतान के लिये आपूर्तिकर्ता उत्तरदायी है, लेकिन आपूर्ति प्राप्तकर्ता द्वारा उसके लिये खर्च वहन किया गया है।

प्र 3. क्या सी.जी.एस.टी., एस.जी.एस.टी. और आई.जी.एस.टी. और वस्तुओं और सेवाओं के लिये अलग मूल्यांकन का प्रावधान हैं?

उत्तरः नहीं, धारा 15 सभी तीन प्रकार के करों के लिये सामान्य है और यह वस्तुओं और सेवाओं के लिए भी सामान्य है।

प्र 4. क्या अनुबंधित मूल्य आपूर्ति के मूल्यांकन को निर्धारित करने के लिये पर्याप्त नहीं है?

उत्तरः अनुबंधित मूल्य अधिकतर विशेष रूप में ”लेनदेन के मूल्य” को संदर्भित करती है और वह कर संगणना के लिए आधार है। हालांकि, जब कीमत कुछ कारकों से प्रभावित होती हैं जैसे पक्षों का आपसी संबंध या कुछ लेनदेन आपूर्ति माने जाते हैं, जिनकी कोई कीमत नहीं होती, लेनदेन के मूल्य को सही ढंग से निर्धारित करने के लिए इन कारकों से उबरना आवश्यक है।

प्र 5. क्या सभी मामलों में मूल्यांकन के नियमों का संदर्भ लेना आवश्यक है?

उत्तरः नहीं। मूल्यांकन नियम का संदर्भ केवल धारा 15(4) के अंर्तगत सूचीबद्ध मामलों में आवश्यक है अर्थात, जहां देय प्रतिफल पैसा नहीं है, या लेन-देन के पक्ष आपस में संबंधित हैं।

प्र 6. ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिये यदि कुछ कारक कीमत को प्रभावित करते हैं जबकि धारा 15(4) द्वारा लेनदेन कवर नहीं किया गया?

उत्तरः धारा 15(2) समायोजनों की सूची प्रदान करती है जिन्हें करने के बाद आप देय कर का निर्धारण करने के प्रयोजनों के लिए लेनदेन की कीमत को विश्वसनीय बना सकते हैं।

प्र 7. क्या धारा 15(1) के अंतर्गत घोषित लेनदेन की कीमत को स्वीकार किया जा सकता है?

उत्तरः हाँ, इसे धारा 15(2) में समावेश करने के लिए जांच करने के बाद स्वीकार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, लेनदेन का मूल्य यहां तक कि आपूर्तिकर्ता और आपूर्ति प्राप्तकर्ता के बीच संबंध होने के बावजूद भी स्वीकार किया जा सकता है, बशर्ते उनके आपसी संबंध के कारण मूल्य प्रभावित नहीं हुआ है (जी.एस.टीमसौदा मूल्यांकन नियमों का नियम 3(4))।

प्र 8. क्या आपूर्ति-के-बाद छूट या प्रोत्साहनों को लेनदेन के मूल्य में शामिल किया जाना चाहिये?

उत्तरः हाँ। जब तक आपूर्ति-के-बाद की छूट अनुबंधों के रूप में स्थापित नहीं की जाती और आपूर्ति के समय या उससे पहले उसका पता नहीं है और विशेष रूप से प्रासंगिक चालान/बिल से नहीं जुड़ी हुई है।

प्र 9. क्या आपूर्ति के समय या उससे पहले अनुमत आपूर्ति-पूर्व छूट को लेन देन के मूल्य में सम्मिलित किया जा सकता है?

उत्तरः नहीं, बशर्ते उसकी सामान्य व्यापार के अभ्यास के क्रम में अनुमति दी गई है और विधिवत चालान/बिल में दर्ज किया गया है।

प्र 10. मूल्यांकन नियम कब लागू होते हैं?

उत्तरः मूल्यांकन के नियम तब लागू होते हैं जब (प) प्रतिफल पैसे के रूप में है; (पप) पक्ष आपस में संबंधित हैं या आपूर्ति किसी निर्दिष्ट वर्ग के आपूर्तिकर्ता की है; और (पपप) घोषित किया गया लेनदेन का मूल्य विश्वसनीय नहीं है।

प्र 11. घोषित लेनदेन मूल्य पर संदेह करने के क्या कारण हैं?

उत्तरः जी.एस.टी. मसौदे के मूल्यांकन नियमों के नियम 7(बी) में वे कारण इंगित किये गये हैं। (वे इस प्रकार हैंः- (प) तुलनीय आपूर्ति की कीमत बहुत ज्यादा है; (पप) लेनदेन आपूर्ति के बाजार मूल्य की तुलना में विशेष रूप से कम या अधिक है, और (पपप) मानकों का गलत घोषित करना जैसे विवरण, मात्रा, गुणवत्ता, उत्पाद का वर्ष इत्यादि। सूची सांकेतिक है लेकिन संपूर्ण नहीं है।

प्र 12. मसौदा जी.एस.टी. मूल्यांकन नियम के मामले में, मूल्य के निर्धारण करने के लिए कौन सी विधियां प्रदान की जाती हैं?

उत्तरः लेनदेन मूल्य निर्धारित करने के लिये जी.एस.टी. मूल्यांकन नियमों के अंर्तगत तीन विधियां निर्धारित की गई हैं अर्थात, तुलनात्मक विधि, गणना विधि और अवशिष्ट विधि, जिनका अनुसरण क्रमिक रूप से किया जाना आवश्यक है इसके अतिरिक्त, कुछ विशिष्ट मूल्यांकन विधियों को निर्दिष्ट किया गया है जैसे शुद्ध एजेंटों और पैसे परिवर्तकों/मनी चेंजरों के मामले में। इसके अतिरिक्त विशिष्ट नियमों को बाद में अधिसूचित किया जा सकता है जैसे बीमा कंपनियां, हवाई यात्रा एजेंट और वितरक या लाॅटरी के विकेता एजेंट।

प्र 13. धारा 15(2) में निर्दिष्ट कौन से समावेषन है़ जिन्हें लेनदेन के मूल्य में जोडा जा सकता है?

उत्तरः धारा 15(2) में निर्दिष्ट वे समावेशन जिन्हें लेनदेन के मूल्य में जोड़ा जा सकता है वह निम्न प्रकार से हैः
क) आपूर्ति प्राप्त कर्ता द्वारा किया गया कोई भुगतान जिसके भुगतान का दायित्व आपूर्तिकर्ता का है;
ख) आपूर्तिकर्ता द्वारा मुफ्त या रियायत पर उपलब्ध की गई वस्तुओं एवं सेवाओं की मूल्य राशि;
ग) आपूर्ति की एक शर्त के रूप में प्राप्तकर्ता द्वारा देय रॉयल्टी और लाइसेंस फीस;
घ) अन्य किसी काननू (ना)ंे क े अतं र्ग त करारापे ण (एस.जी.एस.
टी./ सी.जी.एस.टी. या आई.जी.एस.टी. के अतिरिक्त);
ङ) आपूर्तिकर्ता द्वारा आपूर्ति पूर्व किया गया खर्च एवं अलग
से वसूला गया;
च) आपूर्ति पर आपूर्तिकर्ता द्वारा सब्सिडी प्राप्त करना;
छ) आपूर्तिकर्ता द्वारा अलग से प्रतिपूर्ति का दावा करना;
ज) आपूर्ति के बाद छूट की अनुमति देना केवल जब आपूर्ति से पहले उसके बारे में जानकारी होती है;( छूट की सामान्य व्यापारिक व्यवहार के रूप में अनुमति देना और चालान/बिल पर परिलक्षित करना शामिल किया जाएगा)।


Source: cbec.gov.in