वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रतिदाय (GST Hindi Refunds)

प्र 1. प्रतिदाय/रिफंड क्या है?

उत्तरः प्रतिदाय/रिफंड के बारे में एम.जी.एल. की धारा 38 में चर्चा की गई है। प्रतिदाय/रिफंड में भारत से बाहर विदेशों में निर्यात की गई वस्तुओं और/या सेवाओं पर कर की वापसी या भारत से बाहर विदेशों में निर्यात की गई वस्तुओं और/या सेवाओं में प्रयोग किया गया कच्चा माल/इनपुट या इनपुट सेवाएं, या उन वस्तुओं और/या सेवाओं पर कर की वापसी जिन्हें निर्यात माना गया है, या धारा 38(2) के अंतर्गत प्रदान किये अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट शामिल हैं।

 

प्र 2. क्या अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में प्रतिदाय/रिफंड की अनुमति दी जा सकती है?

उत्तरः हाँ, लेकिन केवल निम्नलिखित मामलों में जैसा धारा 38 की उप-धारा (2) में दिया गया हैंः-

;पद्ध वस्तुओं का निर्यात जिस पर निर्यात शुल्क देय नहीं है;

;पपद्ध सेवाओं का निर्यात;

;पपपद्ध जहां आदानों/इनपुट की दर के कारण संचित किया गया क्रेडिट आउटपुट करों की दर से अधिक है।

 

प्र 3. क्या अप्रयुक्त आई.टी.सी. पर प्रतिदाय/रिफंड दिया जा सकता है, उन मामलों में जहां भारत के बाहर वस्तुओं के निर्यात निर्यात शुल्क के अधीन हैं?

उत्तरः नहीं (एम.जी.एल. की धारा 38(2) के दूसरे प्रावधान के अंतर्गत)।

 

प्र 4. क्या वित्त वर्ष के अंत में स्टाक में रखी वस्तुओं पर आई.टी.सी (जी.एस.टी. लागू होने के बाद) प्रतिदाय/रिफंड किया जा सकता है?

उत्तरः नहीं, इसे आगे ले जाना प्रस्तावित किया गया है।

 

प्र 5. मान लीजिए कि एक कराधीन व्यक्ति ने गलती से आईजी.एस. टी./सी.जी.एस.टी. को अंतर-राज्य/राज्य के भीतर की आपूर्ति के रूप में भुगतान किया है, लेकिन उसकी प्रकृति को बाद में स्पष्ट कर दिया है। क्या गलत तरीके से भुगतान किये सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. को आई.जी.एस.टी. के विरूद्ध समायोजित किया जा सकता है या उसके विपरीत?

उत्तरः नहीं, उसे उपयुक्त कर का भुगतान करना होगा और गलत तरीके से भुगतान किये कर के प्रतिदाय/रिफंड के लिये दावा प्रस्तुत करना होगा। (आई.जी.एस.टी. की धारा 30 और धारा 53)।

 

प्र 6. क्या दूतावासों या संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई खरीदारी पर कर लगेगा या छूट दी जा सकती है?

उत्तरः उस पर कर लगाया जाएगा, जिसे बाद में उनके द्वारा प्रतिदाय/रिफंड का दावा किया जा सकता है।

{संयुक्त राष्ट्र संघ और वाणिज्य दूतावास या दूतावासों को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्राप्त करना आवश्यक है और उनके द्वारा की गई खरीद उनकी विशिष्ट पहचान संख्या उसके आपूर्तिकर्ता की जावक आपूर्ति में परिलक्षित होगी और करों के प्रतिदाय/रिफंड प्रदत्त किये जा सकते हैं। एक अलग प्रक्रिया नियमों में अधिसूचित कर दी जाएगी। जी.एस.टी. धारा 19(6)}

 

प्र 7. प्रतिदाय/रिफंड प्राप्त करने की समय सीमा क्या है?

उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 38 के स्पष्टीकरण में दिए अनुसार संबंधित व्यक्ति को प्रासंगिक तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के भीतर आवेदन दाखिल करना आवश्यक है।

 

प्र 8. क्या न्यायविरूद्ध संवर्धन का सिद्धांत प्रतिदाय/रिफंड पर लागू होगा?

उत्तरः हां, निर्यात और अप्रयुक्त आई.टी.सी. के प्रतिदाय/रिफंड के मामलों को छोड़कर, जैसा धारा 38 की उप-धारा (2) में निर्दिष्ट किया गया है (इसके साथ उपरोक्त प्रश्न संख्या 2 का संदर्भ भी लें)।

 

प्र 9. किसी मामले में यदि कर उपभोक्ता को पारित कर दिया गया है, क्या प्रतिदाय/रिफंड स्वीकृत हो जाएगा?

उत्तरः हाँ, हालांकि, निर्धारित राशि उपभोक्ता के कल्याण कोष में जमा की जाएगी।

 

प्र 10. क्या प्रतिदाय/रिफंड स्वीकृत करने की कोई समय सीमा है?

उत्तरः हाँ, यह सभी मामलों में 90 दिन है, सिवाय उन मामलों के जो, कुछ निर्यात का श्रेणियों के लिए है, जैसे कि धारा 38 की उप-धारा (4ए) में निर्दिष्ट किया गया है और उनके प्रतिदाय/रिफंड का दावा 80 प्रतिशत की हद तक लौटाने योग्य है। यदि प्रतिदाय/रिफंड तीन महीने के भीतर स्वीकृत नहीं किया जाता, तब ऐसी स्थिति में विभाग द्वारा ब्याज का भुगतान होगा।

 

प्र 11. क्या प्रतिदाय/रिफंड पर विभाग द्वारा रोक लगाई जा सकती है?

उत्तरः हाँ, प्रतिदाय/रिफंड पर निम्न परिस्थितियों में रोक लगाई जा सकती हैः

लल यदि पंजीकृत विक्रेता द्वारा रिटर्न(नें) प्रस्तुत नहीं की गई है, जब तक वह रिटर्न(नें) दाखिल नहीं कर देता;

लल यदि एक पंजीकृत कराधीन व्यक्ति को कोई कर, ब्याज या जुर्माने का भुगतान करना अनिवार्य है जिसे अपीलीय प्राधिकारी/ट्रिब्यूनल/अदालत द्वारा स्थगित नहीं किया गया है, जब तक वह इस तरह के कर, ब्याज या जुर्माने का भुगतान नहीं कर देता;

लल ( सक्षम अधिकारी भी बकाया करों को, यदि कोई है, विक्रेता की वापस लौटाने योग्य राशि से घटा सकता है।)

लल आयुक्त/बोर्ड, प्रतिदाय/रिफंड पर रोक लगा सकते हैं, यदि, प्रतिदाय/रिफंड के आदेश अपील के अधीन है

और उसकी राय में इस तरह की प्रतिदाय/रिफंड के अनुदान राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा – (एम.जी. एल. की धारा 38(9))।

 

प्र 12. जहाँ प्रतिदाय/रिफंड पर धारा 38(9) के अंतर्गत रोक लगाई गई है, जैसा कि ऊपर 11(सी) मंे चर्चा की गई है, क्या कराधीन व्यक्ति को ब्याज दिया जाएगा?

उत्तरः यदि अपील के परिणामस्वरूप या आगे की कार्यवाही पर कराधीन व्यक्ति प्रतिदाय/रिफंड के लिए हकदार हो जाता है, तब वह ब्याज पाने का भी हकदार होगा।

 

प्र 13. क्या प्रतिदाय/रिफंड के लिए कोई न्यूनतम सीमा है?

उत्तरः यदि प्रतिदाय रिफंड की राशि 1000/ रू. से कम है तो प्रतिदाय/रिफंड प्रदान नही किया जाएगा।

 

प्र 14. पुराने कानून से उत्पन्न प्रतिदाय/रिफंड का भुगतान कैसे किया जाएगा?

उत्तरः पुराने कानून से उत्पन्न प्रतिदाय/रिफंड का भुगतान पुराने कानून के अनुसार किया जाएगा और नकद (सी.जी.एस.टी. के अंतर्गत) रूप में भुगतान किया जाएगा या पुराने कानून (एस.जी.एस.टी. के अंतर्गत) के प्रावधानों के अनुसार और आई.टी.सी. (एम.जी. एल. की धारा 156, 157 और 158) के रूप में उपलब्ध/देय नहीं

होगा

 

प्र 15. क्या प्रतिदाय/रिफंड का भुगतान दस्तावेजों के सत्यापन से पहले किया जा सकता है?

उत्तरः अधिसूचित श्रेणी के विक्रेताओं के लिए निर्यात प्रतिदाय/रिफंड, सत्यापन से पहले कुछ विशेष शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन जिस रूप में धारा 38(4ए) में निर्धारित किया जा सकता है, 80 प्रतिशत प्रतिदाय प्रदत्त किया जा सकता है ।

 

प्र 16. निर्यात के अंतर्गत प्रतिदाय/रिफंड के मामले में, क्या प्रतिदाय/रिफंड प्रदत्त करने के लिये बी.आर.सी. अनिवार्य है?

उत्तरः चूंकि निर्यातक के पास निर्यात आय प्रेषित करने के लिए निर्यात करने की तारीख से एक वर्ष की समय अवधि है, बी.आरसी.प्रतिदाय/रिफंड क आवेदन के समय उपलब्ध नहीं भी हो सकती। यदि निर्यात की आय अग्रिम में प्राप्त हो चुकी है तब बीआर.सी. उपलब्ध हो सकता है। इस प्रकार, प्रतिदाय/रिफंड बी.आरसी. विवरण की प्रस्तुति के अधीन होना चाहिए अधिकतम एक वर्ष की अवधि के भीतर या जैसा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विस्तारित किया गया हो। डी.जी.एफ.टी. का ई-बी.आर.सी. मॉड्यूल जी.एस. टी. मॉड्यूल के साथ एकीकृत किया जाएगा। हालांकि सेवाओं के निर्यात के लिए प्रतिदाय/रिफंड की स्वीकृति से पहले बीआरसी का होना आवश्यक होगा।

 

प्र 17. क्या न्यायविरूद्ध संवर्धन का सिद्धांत निर्यात या माने गये निर्यात ;कममउमक मगचवतजेद्ध पर लागू होंगे ?

उत्तरः न्यायविरूद्ध संवर्धन के सिद्धांत वस्तुओं या सेवाओं के वास्तविक निर्यात के मामलों में लागू नहीं होंगे क्योंकि प्राप्तकर्ता कराधीन क्षेत्र के बाहर स्थित है। हालांकि, माने गये निर्यात ;कममउमक मगचवतजेद्ध के

मामले में वह अवश्य लागू होंगे।

प्र 18. एक व्यक्ति यह कैसे साबित करेगा कि न्यायविरूद्ध संवर्धन के सिद्धांत उसके मामले में लागू नहीं होते हैं?

उत्तरः संबंधित व्यक्ति अपने आवेदन के साथ ऐसे दस्तावेज(जांे) या साक्ष्य(यों) को प्रस्तुत करके स्थापित कर सकते हैं कि कर और ब्याज की राशि, यदि कोई है, ऐसे कर के लिये भुगतान किया गया है या जिस प्रतिदाय/रिफंड के संबंध में दावा किया है उसके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को पारित नहीं किया गया है – धारा 38(3)(बी)। इसके अतिरिक्त, करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए ऊपरोक्त उपधारा यह भी प्रावधान करती है कि जहां प्रतिदाय/रिफंड की राशि का दावा किया गया है, 5 लाख रुपये से कम है उसके लिये केवल आत्म-घोषणा करना ही आवश्यक होगा।

 

प्र 19. मौजूदा समय में वैट/सी.एस.टी. व्यापार के अंतर्गत निर्यातक घोषणा पत्र प्रस्तुत कर बिना कर के भुगतान किये वस्तुएं खरीद सकते हैं। क्या जी.एस.टी. में भी यह प्रणाली अस्तित्व में रहेगी? उत्तरः नहीं, जी.एस.टी. में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होगा। उन्हें कर का भुगतान करने के बाद वस्तुएं खरीदनी होंगी और संचित की गई आई.टी.सी. का दावा करना होगा जैसा कि धारा 38(2) में चर्चा की गई है।

प्र 20. केंद्रीय कानून के अंतर्गत वर्तमान में, निर्यातकों को शुल्क के भगु तान की े र्गइ  इनपटु /आदाना ंे पा्र प्त करन े की अनमु ति ह,ै उस पर आई.टी.सी. ले सकते हैं और शुल्क का भुगतान करने के बाद वस्तुओं का निर्यात कर सकते हैं (आई.टी.सी. का उपयोग करने के बाद) और तत्पश्चात नियार्त पर भगु तान शल्ु क का प्िर तदाय/रिफडं का दावा कर सकते हैं। क्या जी.एस.टी. में भी यह प्रणाली जारी रहेगी?

उत्तरः जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत निर्यात शून्य दरों पर किया जाएगा जिसका अर्थ यह है कि निर्यात की गई वस्तुओं पर कोई भी वास्तविक कर देनदारी नहीं होगी हालांकि इस तरह के निर्यात के इनपुट/आदानों के लिये कर का भुगतान किया जाएगा। जी.एस. टी. व्यवस्था के अंतर्गत, प्रतिदाय/रिफंड संचित की गई इनपुट/

आदानों तथा तैयार निर्यात वस्तुओं पर स्वीकार्य होगा।