GST: निरीक्षण तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी (Inspection, Search, Seizure and Arrest)

प्र 1. शब्द ”तलाशी” का क्या अर्थ है?
उत्तरः कानूनी शब्दकोश के अनुसार और विभिन्न न्यायिक निर्णयों में नोट के रूप में, शब्द ”तलाशी”, का सरल भाषा में अर्थ, सरकारी
मशीनरी की एक कार्रवाई करना, देखना या एक स्थान, क्षेत्र, व्यक्ति, वस्तुओं इत्यादि का बड़ी सावधानी के साथ यह जानने के लिये निरीक्षण करना कि कहीं कुछ छिपाया तो नहीं गया है या किसी अपराध के साक्ष्यों की तलाशी के उद्देश्य के लिए। एक व्यक्ति या
वाहन या परिसर आदि की तलाशी केवल कानून के उपयुक्त और वैध अधिकार के अंतर्गत किया जा सकता है।
प्र 2. ”निरीक्षण” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तरः एम.जी.एल. के अंतर्गत शब्द ”निरीक्षण” एक नया प्रावधान है। यह तलाशी की तुलना में एक नरम प्रावधान है जो अधिकारियों को
कराधीन व्यक्ति के व्यापार के किसी भी स्थान पर और इसके साथ ही उस व्यक्ति जो माल के परिवहन में संलग्न है या जो स्वामी है
या एक मालगोदाम या गोदाम का आॅपरेटर है उस तक पहुंच बनाने में सक्षम करता है।
प्र 3. ”निरीक्षण” कार्यान्वयन करने के आदेश कौन तथा किन परिस्थितियों में दे सकता है?
उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 60 के अनुसार, निरीक्षण का कार्यान्वयन सी.जी.एस.टी/एस.जी.एस.टी क े सयं क्तु आयक्तु या उसस े ऊपर के रकंै क े एक अधिकारी द्वारा लिखित अधिकार पत्र क े अतं गर्त किया जा सकता है। संयुक्त आयुक्त या उससे उच्च अधिकारी इस तरह के प्राधिकार सिर्फ तभी द े सकत े ह ंै जब उनक े पास यह विश्वास करने के पर्याप्त कारण हैं कि संबंधित व्यक्ति ने निम्न में से एक किया हैः
पण् आपूर्ति के किसी लेनदेन को दबाया है;
पपण् हाथ में वस्तुओं के स्टाॅक को दबाया है;
पपपण् ज्यादा इनपुट कर क्रेडिट का दावा किया है;
पअण् कर के लिए सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन किया है;
अण् एक ट्रांसपोर्टर या गोदाम के मालिक के पास कुछ माल रखा है जिसपर कर का भुगतान बचाया गया है या अपने खातों या माल को इस तरीके से किसी स्थान पर रख दिया है कि कर से बचने की संभावना हो।
प्र 4. क्या इस धारा के अंतर्गत सक्षम अधिकारी किसी व्यक्ति की किसी संपत्ति/परिसर का निरीक्षण अधिकृत कर सकते हैं?
उत्तरः नहीं, प्राधिकृति केवल सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. के अधिकारी को निम्न में से किसी एक के निरीक्षण करने के लिये दी
जा सकती हैः
पण् कराधीन व्यक्ति के व्यापार का कोई स्थान;
पपण् एक व्यक्ति जो वस्तुओं के परिवहन के कारोबार में संलग्न है उस व्यक्ति के व्यापार के किसी भी स्थान पर चाहे वह पंजीकृत कराधीन व्यक्ति है या नहीं;
पपपण् एक मालिक या मालगोदाम या गोदाम के संचालक के किसी व्यापारिक स्थान पर।

प्र 5. एम.जी.एल. के प्रावधानों के अंतर्गत तलाशी और जब्ती के लिए कौन आदेश दे सकता है?
उत्तरः संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर की रैंक का अधिकारी किसी अधिकारी को लिखित रूप में तलाशी और वस्तुओं, दस्तावेजों,
किताबों या अन्य चीजों को जब्त करने की लिखित रूप में प्राधिकृति दे सकते हैं। संयुक्त आयुक्त इस तरह के प्राधिकार सिर्फ तभी दे
सकते हैं जब उनके पास यह विश्वास करने के प्रयाप्त कारण हैं कि कोई माल जब्ती के लिये उत्तरदायी है या कोई दस्तावेज़ या खाते
या वस्तुएं किसी कार्यवाही के लिये प्रासंगिक हैं उन्हें किसी स्थान पर छिपाया गया है।

प्र 6. ”विश्वास करने के कारण” का क्या मतलब है?
उत्तरः ”विश्वास करने के कारण” तथ्यों को जानने का ज्ञान, हालांकि प्रत्यक्ष ज्ञान के बराबर नहीं, होना है जिससे एक तर्कसंगत,
वैसे ही तथ्यों को जानने वाला, व्यक्ति तर्क संगत रूप से उसी तरह के नतीजे पर पंहुचता है। भारतीय दंड सहिता 1860 की धारा
26 के अनुसार, एक व्यक्ति को एक चीज का ‘‘विश्वास करने का कारण‘‘ रखते हुए कहा जाता है यदि उसके पास उस बात पर
विश्वास करने का पर्याप्त कारण है किन्तु अन्यथा नहीं। ”विश्वास करने के लिए कारण” विशुद्ध रूप से व्यक्ति परक विचार से भिन्न
बुद्धिमत्तापूर्ण देखभाल एवं मूल्यांकन पर आधारित एक उद्देश्य के लिए दृढ़ संकल्प का चिन्तन है। प्रासंगिक सामग्री और परिस्थितियों
के आधार पर एक ईमानदार एवं उचित (तर्कसंगत) व्यक्ति का यह (”विश्वास करने के कारण”) होना चाहिए एवं होना ही चाहिए।

प्र 7. निरीक्षण या तलाशी और जब्ती की प्राधिकृति जारी करने से पहले, क्या कथित ”विश्वास करने के कारण” को सक्षम अधिकारी
द्वारा लिखित रूप में दर्ज किया जाना अनिवार्य है?
उत्तरः हालांकि अधिकारी को तलाशी के लिए एक प्राधिकृति जारी करने से पहले इस तरह के विश्वास के लिए कारणों को व्यक्त
करना आवश्यक नहीं है, उसे वह सामग्री जिस पर उसका विश्वास आधारित था उसका खुलासा करना होगा। अविश्वास करने का
कारण प्रत्येक मामले में निरपवाद रूप से दर्ज किये जाने की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह बेहतर होगा यदि सामग्री/जानकारी आदि सर्च वारंट जारी करने से पहले या तलाशी की कार्यवाही से पहले दर्ज की जाएं।
प्र 8. सर्च वारंट क्या है और उसकी विषय-वस्तु क्या है?
उत्तरः तलाशी करने के लिये लिखित प्राधिकृति को आमतौर पर सर्च वारंट कहा जाता है। सर्च वारंट जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी
संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के रैंक का अधिकारी है। एक सर्च वारंट में एक तर्कसंगत विश्वास का संकेत होना आवश्यक है जिसके
कारण तलाशी की जा रही है। सर्च वारंट में निम्नलिखित विवरण शामिल करना चाहिएः
पण् अधिनियम के अंतर्गत उल्लंघन,
पपण् तलाशी किये जाने वाला परिसर,
पपपण् प्राधिकृत तलाशी करने वाले व्यक्ति का नाम और पदनाम,
पअण् जारी करने वाले अधिकारी की गोल मुहर सहित पूर्ण पदनाम और नाम,
अण् जारी करने की तारीख और स्थान,
अपण् सर्च वारंट का क्रमांक नंबर,
अपपण् वैधता की अवधि अर्थात एक दिन या दो दिन आदि
प्र 9. एम.जी.एल. के प्रावधानों के अंतर्गत कब वस्तुएं जब्ती के लिए उत्तरदायी हो जाती हैं?
उत्तरः मॉडल जी.एस.टी. कानून की धारा 70 के अनुसार, वस्तुओं तब जब्ती के लिए उत्तरदायी हो जाती हैं जब कोई व्यक्ति निम्न
गतिविधियों में संलग्न रहता हैः
(प) इस अधिनियम के प्रावधानों या उसके अंतर्गत बने नियमों का उल्लंघन करते हुए किसी भी वस्तुओं की आपूर्ति करता है जो कर की चोरी में परिणत होती है;
(पप) इस अधिनियम के अंतर्गत कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी वस्तुओं नहीं रखता;
(पपप) बिना पंजीकरण हेतु आवेदन इस अधिनियम के अंतर्गत किसी प्रकार की वस्तुओं की आपूर्ति करता है जिस पर
कर का दायित्व है;
(पअ) कर भुगतान से बचने के इरादे से सी.जी.एस.टी./एसजी.ए स.टी. अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रावधानों का किसी भी प्रकार का उल्लंघन।

प्र 10. एक अधिकारी द्वारा वैध तलाशी के दौरान किन शक्तियों का प्रयोग किया जा सकता है?
उत्तरः एक तलाशी करने वाले अधिकारी के पास तलाशी किये जाने वाले परिसर से वस्तुओं (जो जब्ती के लिए उत्तरदायी हैं) और
दस्तावेज़ों, खाता बहियों या अन्य सामान (एम.जी.एल. के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही के लिए प्रासंगिक) की तलाशी और जब्ती करने
की शक्तियां होती हैं। तलाशी के दौरान, जिस परिसर पर एक अधिकारी को तलाशी के लिये प्राधिकृत किया गया है यदि उसे प्रवेश करने से इन्कार किया जाता है तब उस अधिकारी के पास परिसर के प्रवेश द्वार को तोड़ने की शक्ति भी प्राप्त है। इसी प्रकार, परिसर के भीतर तलाशी करते समय, वह किसी भी अलमारी या डिब्बे को तोड़ सकता है यदि उसे कथित अलमारी या बॉक्स की जांच करने से इन्कार किया जाता है और उसे उसमें किसी प्रकार की वस्तुओं, खातों, रजिस्टर या दस्तावेज़ के छिपा होने का संदेह है। वह परिसर को सीलबंद भी कर सकता है यदि उसे प्रवेश करने से इन्कार किया जाता है।
प्र 11. तलाशी के संचालन के लिए क्या प्रक्रिया है?
उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 60(8) निर्धारित करती है कि तलाशी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों के अनुरूप क्रियान्वित की जानी चाहिए। दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 100 तलाशी के लिए प्रक्रिया का वर्णन करती है।
प्र 12. तलाशी अभियान के दौरान किन बुनियादी आवश्यकताओं का अवलोकन किया जाता है?
उत्तरः तलाशी के दौरान निम्नलिखित सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिएः
लल सक्षम अधिकारी द्वारा जारी वैध सर्च वारंट के बिना परिसर की तलाशी नहीं ली जानी चाहिए।
लल िनरपवाद रूप से किसी आवास में तलाशी दल के साथ हमेशा एक महिला अधिकारी शामिल रहनी चाहिए।
लल तलाशी शुरू करने से पहले अधिकारियों को परिसर के प्रमुख व्यक्ति को अपना पहचान पत्र दिखा कर अपनी पहचान का खुलासा करना चाहिए।
लल सर्च वारंट तलाशी शुरू करने से पहले परिसर के प्रमुख व्यक्ति को दिखाकर निष्पादित किया जाना चाहिए और उसके हस्ताक्षर सर्च वारंट पर ले लेने चाहिए जो प्रमाण होगा कि उक्त व्यक्ति ने सर्च वारंट देखा है। कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर भी सर्च वारंट पर लिये
जाने चाहिए।
लल तलाशी इलाके के कम से कम दो स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में की जानी चाहिए। यदि ऐसे कोई निवासी उपलब्ध/इच्छुक नहीं है, तब पास के किसी अन्य इलाके के निवासियों को तलाशी की गवाही के लिये निवेदन किया जाना चाहिए। गवाहों को तलाशी के उद्देश्य के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए।
लल तलाशी की कार्यवाही शुरू करने से पहले, तलाशी आयोजित करने वाले अधिकारियों की टीम को गवाहों सहित परिसर के प्रमुख व्यक्ति को उनकी स्वयं की व्यक्तिगत तलाशी करने के लिए प्रस्तुत करना चाहिए। इसी तरह, तलाशी पूर्ण हो जाने के बाद सभी अधिकारीं और गवाहों को एक बार फिर उनकी स्वयं की व्यक्तिगत तलाशी करने के लिए प्रस्तुत करना चाहिए।
लल तलाशी की कार्यवाही का पंचनामा/महाजर तलाशी स्थल पर तैयार करना अति आवश्यक है। सभी बरामद/जब्त की गई वस्तुओं, दस्तावेज़ों की सूची तैयार कर पंचनामा/महाजर के साथ संलग्न की जानी चाहिए। पंचनामा/महाजर और सभी बरामद/जब्त की
गई वस्तुओं, दस्तावेज़ों की सूची पर गवाहों, परिसर प्रमुख/परिसर के स्वामी जिसके समक्ष तलाशी का संचालन किया गया है और प्रभारी अधिकारी जिसे तलाशी के लिये प्राधिकृत किया गया है निरपवाद रूप से उन सबके हस्ताक्षर लेने चाहिए।
लल तलाशी की समाप्ति के बाद, निष्पादित सर्च वारंट को उसके मूल रूप में उसके जारीकर्ता को तलाशी के संबंध में नतीजे तलाशी के नतीजे के रिपोर्ट सहित वापस लौटा देना चाहिए। जिन अधिकारियों ने तलाशी में भाग लिया है उनके नाम भी तलाशी वारंट के पीछे लिखे जा सकते हैं।
लल सर्च वारंट जारीकर्ता अधिकारी को जारी किए गए तथा वापस लौटाए गए सर्च वारंट के रिकार्ड का रजिस्टर बनाना चाहिए तथा प्रयोग किए गए सर्च वारंट को रिकार्ड ने रखना चाहिए।लल अपने संलग्नक के साथ पंचनामा/महाजर की एक प्रति उस परिसर प्रमुख/परिसर के स्वामी जहां पर तलाशी ली गई थी उसकीे अभिस्वीकृति प्राप्त करने के साथ सौंप देनी चाहिये।

प्र 13. क्या एक सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. अधिकारी किसी भी अन्य परिस्थितियों के अंतर्गत व्यापारिक परिसर में प्रवेष कर सकता
है?
उत्तरः हाँ। एम.जी.एल. की धारा 64 के अनुसार प्रवेश किया जा सकता है। कानून का यह प्रावधान सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.
टी. अधिनियम की धारा 50 के अंतर्गत नामित सी.जी.एस.टी./एसजी.ए स.टी. या एवं सीएसीजी या एक लागत लेखाकार या चार्टर्ड
एकाउंटेंट की एक लेखा-परीक्षण की पार्टी को अनुमति के लिये बनाया गया है, लेखा-परीक्षण, जांच, सत्यापन और निरीक्षण के प्रयोजनों के लिये सर्च वारंट जारी किये बिना भी किसी व्यावसायिक परिसर में प्रवेश किया जा सकता है जैसा राजस्व के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हो। हालांकि, उसके लिये सी.जी.एस.टी. या एस.जी.एस.टी. के अपर/संयुक्त आयुक्त के रैंक के अधिकारी द्वारा लिखित रूप में प्राधिकृति जारी की जानी चाहिए। यह प्रावधान उस व्यवसायिक परिसर में प्रवेश की सुविधा प्रदान करता है जिसे कराधीन व्यक्ति द्वारा उसके प्रमुख या अतिरिक्त व्यापारिक स्थल के रूप में पंजीकृत नहीं किया गया, लेकिन वहां पर उसके खाता बहियां, दस्तावेज, कंप्यूटर आदि रखे हैं जो लेखा-परीक्षण या कराधीन व्यक्ति के खातों के सत्यापन के लिए आवश्यक हैं।

प्र 14. कब तलाशी अवैध कही जाती है? क्या एक अवैध तलाशी में एकत्र किये साक्ष्य मुकदमे की कार्यवाही में स्वीकार्य हंै?
उत्तरः बिना एक वैध सर्च वारंट के की गई तलाशी (यानी एक सक्षम प्राधिकारी को छोड़कर किसी अन्य से जारी या सर्च वारंट के बिना) का परिणाम, बिना कानून के अधिकार की अवैध तलाशी है। हालांकि, इस कारण से, आरोपी को लाभ नहीं मिल सकता। तद्नुसार, एक अवैध तलाशी के दौरान एकत्रित साक्ष्य और जब्ती को सुनवाई और न्यायिक निर्णय की कार्यवाही में स्वीकार्य माना जाता है।

प्र 15. शब्द ”जब्ती” का क्या मतलब है?
उत्तरः मॉडल जी.एस.टी. कानून में शब्द ”जब्ती” को विशेषरूप से परिभाषित नहीं किया गया है। लाॅ लैक्सिकाॅन शब्दकोष में, ”जब्ती”
को कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत एक अधिकारी द्वारा संपत्ति का कब्जा लेने की कार्रवाई के रूप में परिभाषित किया गया है। आम तौर पर
इसका आशय संपत्ति के मालिक की इच्छा के विरूद्ध जबरन कब्जा प्राप्त करना या जिसके कब्जे में संपत्ति है एवं जो वह उसे बंाटना/
उससे अलग होना नहीं चाहता था।

प्र 16. क्या एम.जी.एल. के पास वस्तुओं और वाहनों को नजरबंद ;क्मजमदजपवदद्ध रखने की भी शक्ति है?
उत्तरः हाँ, एम.जी.एल. की धारा 69 के अंतर्गत एक अधिकारी के पास मालवाहक वाहन (एक ट्रक या अन्य प्रकार का वाहन) के साथ-साथ
वस्तुओं को हिरासत में लेने की शक्ति है। ऐसा उस तरह की वस्तुओं के साथ किया जा सकता है जिन्हें एम.जी.एल. के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मार्ग में ले जाया जा रहा हो या जमा किया गया हो। ऐसी वस्तुएं जिन्हें भण्डारित किया गया हो या स्टोर में जमा किया गया हो परन्तु उनका कोई हिसाब नहीं रखा गया हो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। इस तरह के सामान और वाहन को उनपर लागू कर के भुगतान के बाद या समतुल्य राशि की सुरक्षा राशि प्रस्तुत करने पर छोड़ा जा सकता है।

प्र 17. कानून में ”जब्ती” ;ैमप्रनतमद्ध और ”हिरासत” ;क्मजमदजपवदद्ध के बीच क्या भेद है ?
उत्तरः संपत्ति के मालिक या जिस व्यक्ति के कब्जे में संपत्ति है उस व्यक्ति को समय के किसी विशेष क्षण पर कानूनी आदेश/नोटिस
द्वारा संपति में प्रवेश करने से इन्कार करने को हिरासत कहा जाता है। जब्ती विभाग द्वारा वस्तुओं पर वास्तविक कब्जा लेना है। जब्ती
का आदेश तब जारी किया जाता है जब यह संदेह होता है कि वस्तुएं जब्ती के लिए उत्तरदायी हैं। हिरासत तब की जाती है जब पूछताछ/जांच करने के बाद पूरा विश्वास हो जाता है कि वस्तुएं जब्ती के लिए उत्तरदायी हैं।

प्र 18. एम.जी.एल. में तलाशी ;ैमंतबीद्ध या जब्ती ;ैमप्रनतमद्ध के संबंध में प्रदान किये गये सुरक्षा उपाय क्या हैं?
उत्तरः मॉडल सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. कानून की धारा 60 में तलाशी या जब्ती की शक्ति के संबंध में कुछ सुरक्षा उपाय प्रदान
किये गए हैं। ये निम्न प्रकार से हैंः
पण् जब्त की गई वस्तुएं या दस्तावेज उनके निरीक्षण के लिए आवश्यक अवधि के बाद नहीं रखे जाने चाहिए;
पपण् िजस व्यक्ति की अभिरक्षा में से दस्तावेज़ जब्त किये गये हैं वह दस्तावेजों की फोटोकॉपीे ले सकता है;
पपपण् जब्त की गई वस्तुओं के लिये, यदि जब्त करने के साठ दिनों के भीतर नोटिस जारी नहीं किया जाता, तब उस व्यक्ति को वह वस्तुएं वापस लौटा दी जाएंगी जिसके कब्जे से वे जब्त की गई थी। साठ दिनों की यह अवधि छह महीने की अधिकतम अवधि तक न्यायोचित आधार पर बढ़ाई जा सकती है;
पअण् जब्त करने वाले अधिकारी द्वारा सामान/वस्तुओं की सूची बनाई जाएगी;

अण् मॉडल जी.एस.टी. नियमों के अंतर्गत कुछ वस्तुओं की श्रेणियां निर्दिष्ट (जैसे जल्दी खराब होने वाली, खतरनाक आदि) की गई है जिनका जब्ती के तुरंत बाद निपटारा किया जा सकता है;

अपण् दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तलाशी और जब्त करने से संबंधित प्रावधान लागू होंगे। हालांकि, दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 165 की उपधारा (5) के संबंध में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है – बजाय तलाशी से संबंधित किसी रिकार्ड की प्रतिलिपि अपने निकटतम मजिस्ट्रेट, जिसे अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार है, के पास भेजने के उन्हें सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टीके प्रमुख आयुक्त/आयुक्त आयुक्त को भेजा जाना है।

प्र 19. क्या कराधीन वस्तुओं के परिवहन के दौरान कोई विशेष दस्तावेज़ रखना अनिवार्य है?
उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 61 के अंतर्गत, एक परिवहन वाहन के प्रमुख को यदि वह ऐसा माल ले जा रहा है जिसका मूल्य पचास
हजार रुपए से अधिक है तब उसे एक निर्धारित दस्तावेज रखना आवश्यक हो सकता है।

प्र 20. शब्द ”गिरफ्तार” ;।ततमेजद्ध का क्या मतलब है?
उत्तरः शब्द ”गिरफ्तार” को मॉडल जी.एस.टी. कानून में परिभाषित नहीं किया गया है। हालांकि, न्यायिक घोषणाओं के अनुसार, यह
अर्थ है ‘‘किसी व्यक्ति को कानूनी आदेश या अधिकार के अंतर्गत अपने अधिकार में लेना’’। दूसरे शब्दों में एक व्यक्ति को गिरफ्तार
किया गया कहा जाता है जब उसे ले लिया जाता है और कानूनन वैध वारंट की शक्ति या रंग से उसकी स्वतंत्रता को नियंत्रित किया जाता है।

प्र 21. एम.जी.एल. के अंतर्गत सक्षम अधिकारी किसी व्यक्ति की ”गिरफ्तारी” को कब प्राधिकृत कर सकता है?
उत्तरः सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. के आयुक्त, एस.जी.एस.टीआय ुक्त को एक की गिरफ्तार करने के लिये अधिकृत कर सकता
198 है, यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि व्यक्ति ने अपराध किया है जिसकी सजा सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टीअधिनिय
म की धारा 73(1)(प), 7373(1)(पप) और 73(2) के अंतर्गत निर्धारित की गई है । मूलतः इसका मतलब यह है कि एक व्यक्ति को केवल तब गिरफ्तार किया जा सकता है यदि उसके द्वारा की गई कर की चोरी पचास लाख रुपए से अधिक है या जहां एक व्यक्ति को पहले मॉडल सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 73 के अंतर्गत अपराध के लिए दोषी ठहराया जा चुका है।

प्र 22. एक व्यक्ति जिसे गिरफ्तारी में रखा गया है उसके लिये एम.जी.एल. के अंतर्गत प्रदान किये सुरक्षा उपाय क्या हैं?
उत्तरः धारा 62 के अंतर्गत एक गिरफ्तार व्यक्ति को कुछ सुरक्षा उपाय प्रदान किये गये हैः वे हैः
पण् यदि एक व्यक्ति को एक संज्ञेय अपराध के लिए गिरफ्तार किया है, उसे गिरफ्तार करने के आधार के बारे में लिखित रूप में सूचित किया जाना चाहिए और उसकी गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना आवश्यक है;
पपण् यदि एक व्यक्ति को एक गैर-संज्ञेय और जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार किया है, तब सी.जी.एस.टी. /एस.जी.एस.टी. के उप/ सहायक आयुक्त उसे जमानत पर रिहा कर सकते हैं और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436 के अंतर्गत वह पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी के
रूप में उन सभी प्रावधानों के अधीन होगा;
पपपण् सभी गिरफ्तारी दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार होनी चाहिए;

प्र 23. गिरफ्तारी के दौरान कौन सी सावधानियों बरती जानी चाहिएं?
उत्तरः दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में गिरफ्तार करने और उसकी प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।
इसलिए सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. के सभी क्षेत्र अधिकारियों को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों के साथ अच्छी तरह परिचित
होना आवश्यक है। सीआरपीसी, 1973 की धारा 57 के एक प्रावधान पर ध्यान आकर्षित करना बहुत महत्वपूर्ण है जो प्रदान करता है कि एक व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार करने पर हिरासत में लंबी अवधि तक नहीं रखा जा सकता, मामले की परिस्थिति के अंतर्गत, यह उचित है लेकिन वह 24 घंटों (गिरफ्तारी की जगह से यात्रा के समय को छोड़कर मजिस्ट्रेट की अदालत तक) से अधिक नहीं होगा। इस अवधि के
भीतर, जैसा कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 56 के अंतर्गत प्रदान किया गया है, गिरफ्तार करने वाला व्यक्ति बिना वारंट के गिरफ्तार
किये व्यक्ति को मामलें में क्षेत्राधिकार रखने वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करेगा। डी. के. बसु बनाम प. बंगाल सरकार के मामले का एक ऐतिहासिक फैसला 1997(1) एस.सी.सी. 416 में, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ विशिष्ट दिशानिर्देश निर्धारित किये है जिनका गिरफ्तारी करते समय पालन करना आवश्यक है। जबकि इसका संबंध पुलिस से है, इसका अनुसरण उन सभी विभागों द्वारा करना आवश्यक है जिन्हें गिरफ्तारी की शक्तियां प्रदान की गई हैं।

ये निम्न प्रकार हैंः

पण् वे पुलिसकर्मी जो गिरफ्तारी और गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ करते हैं उन्हें सटीक, दृश्य और स्पष्ट पहचान
और उनके पदनाम के साथ नाम के बिल्ले लगाने चाहिए। इस तरह के सभी पुलिस कर्मियों को जो गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ करते हैं उन्हें इन सबके विवरण एक रजिस्टर में दर्ज करने चाहिए।

पपण् पुलिस अधिकारी जो गिरफ्तारी करते हैं वह गिरफ्तारी के समय एक गिरफ्तारी ज्ञापन तैयार करेंगे और ऐसे ज्ञापन को कम से कम एक गवाह द्वारा अभिप्रमाणित किया जाएगा, जो या तो परिवार का एक सदस्य या इलाके का एक सम्मानित व्यक्ति हो सकता है जहां पर
गिरफ्तारी की गई है। इसे गिरफ्तार व्यक्ति द्वारा भी प्रतिहस्ताक्षरित किया जाएगा और उसमें गिरफ्तारी का समय और तिथि शामिल होनी चाहिए।

पपपण् एक व्यक्ति जिसे गिरफ्तार किया गया है या हिरासत मे रखा गया है और एक पुलिस स्टेशन या पूछताछ केंद्र या अन्य लॉक अप में निगरानी में रखा गया है, उसे जितनी शीघ्र व्यावहारिक है उसके एक दोस्त या रिश्तेदार या अन्य परिचित व्यक्ति या ऐसे व्यक्ति को सूचित करना चाहिए जिसे उसके कल्याण में रुचि है, कि उसे गिरफ्तार किया गया है ओर अब किसी विशेष स्थान पर हिरासत में रखा गया है, सिवाय उस स्थिति को छोड़कर जिसमें गिरफ्तारी के ज्ञापन का सत्यापन गवाह स्वयं ऐसा एक दोस्त या गिरफ्तार व्यक्ति का कोई रिश्तेदार है।

पअण् िगरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तार करने का समय, स्थान और हिरासत में रखे जाने वाला स्थल पुलिस द्वारा अधिसूचित किया जाना चाहिए और जहां गिरफ्तार व्यक्ति का अगला दोस्त या रिश्तेदार जिले या शहर से बाहर रहता है वहां पर जिले के विधिक स्थानीय
सहायता संगठन के माध्यम से क्षेत्र के संबंधित पुलिस स्टेशन पर तार के माध्यम से गिरफ्तारी के बाद 8 से 12 घंटे की अवधि के भीतर करना चाहिए।
अण् व् यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में हिरासत स्थल की प्रविष्टि एक डायरी में दर्ज की जानी चाहिए जिसमें उसके अगले करीबी दोस्त का नाम लिखा जाना चाहिए जिसे गिरफ्तारी के बारे में सूचित किया गया है और उन पुलिस अधिकारियों के ब्यौरे दर्ज करने चाहिऐ जिनके अधिकार में उस गिरफ्तार व्यक्ति को रखा गया है।
अपण् िगरफ्तार व्यक्ति को, उसके निवेदन पर, गिरफ्तारी के समय उसकी छोटी-बड़ी चोटों के लिये जांच की जानी चाहिये और यदि उसके शरीर में कोई पाई जाती है, उसे उसी समय दर्ज कर देना चाहिए। ‘निरीक्षण ज्ञापन‘ गिरफ्तार व्यक्ति और गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किया जाना चाहिए और उसकी एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को प्रदान की जानी चाहिए।

अपपण् िहरासत के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति की स्वास्थ्य जांच हर 48 घंटे बाद प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा की जानी चाहिए जिसकी नियुक्ति निदेशक, स्वास्थ्य सेवा, संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य सेवा द्वारा नियुक्त अनुमोदित डॉक्टरों के पैनल में से की गई है, साथ ही निदेशक, स्वास्थ्य सेवा को सभी तहसीलों और जिलों के लिए एक पैनल बनाना चाहिए।
अपपपण् िगरफ्तारी ज्ञापन सहित ऊपर उल्लिखित सभी दस्तावेज़ों की प्रतियां मैजिस्टेªट को उनके रिकार्ड के लिये भेज दी जानी चाहिए।
पगण् पूछताछ के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति को उसके वकील से मिलने की अनुमति दी जा सकती है, यद्यपि पूछताछ के सारे समय नहीं।
गण् सभी जिलों और राज्य मुख्यालयों में एक पुलिस कंट्रोल 202 रूम प्रदान करना चाहिए जिसमें गिरफ्तारी से संबंधित और गिरफ्तार व्यक्ति की हिरासत के स्थल की सूचना गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी द्वारा, गिरफ्तारी करने के 12 घंटे के भीतर, संचारित की जाएगी और पुलिस नियंत्रण कक्ष पर इसे एक विशिष्ट नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

प्र 24. सी.बी.ई.सी. में गिरफ्तारी के लिए किन व्यापक दिशा निर्देशों का अनुपालन करना चाहिए?
उत्तरः गिरफ्तार करने के निर्णय में अलग अलग मामलों में विभिन्न कारकों पर विचार करके लिए जाते हैं, जैसे, अपराध की प्रकृति एवं
गंभीरता, कितने परिमाण में शुल्क की चोरी की गई है या अनुचित तरीके से क्रेडिट का गलत लाभ उठाया, साक्ष्य की प्रकृति और गुणवत्ता, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना के साथ या गवाहों को प्रभावित करना, जांच के साथ सहयोग करना, आदि। गिरफ्तारी के लिए शक्ति का निष्पादन सावधानी के साथ मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद निष्पादित करना चाहिए जिनमें निम्न शामिल हो सकते हैंः
पण् अपराध की उचित जांच सुनिश्चित करना;
पपण् ऐसे व्यक्ति को फरार होने से रोकने के लिए;
पपपण् वस्तुओं की संगठित तस्करी से जुड़े मामलों या छिपाने के माध्यम से सीमा शुल्क की चोरी;
पअण् बेनामी आयात/छद्मी एवं गैर-विद्यमान व्यक्तियों के नाम से किए जा रहे निर्यात/आई.ई.सी., इत्यादि करने वाले अति चतुर या प्रमुख संचालक;
अण् जहां शुल्क से बचने का इरादा स्पष्ट है और अपराधी मन के तत्व/दोषी मन साफ नजर आता है;
अपण् साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना की रोकथाम;
अपपण् गवाहों को डराना या प्रभावित करना; तथा
अपपपण् बड़ी मात्रा में शुल्क या सेवा कर की चोरी जिसकी कीमत कम से कम एक करोड़ रुपए से अधिक है।

प्र 25. एक संज्ञेय अपराध क्या है?
उत्तरः आमतौर पर, संज्ञेय अपराध का मतलब एक गंभीर वर्ग का अपराध है जिसके संबंध में एक पुलिस अधिकारी के पास बिना वारंट
के गिरफ्तार करने का अधिकार है और अदालत की अनुमति के साथ या बिना अनुमति लिए जांच शुरू करने का अधिकार है।

प्र 26. एक-गैर संज्ञेय अपराध क्या है?
उत्तरः गैर-संज्ञेय अपराध अपेक्षाकृत कम गंभीर अपराध है जिसके संबंध में एक पुलिस अधिकारी के पास बिना वारंट के गिरफ्तारी का
अधिकार नहीं है और बिना अदालत के आदेश के जांच शुरू नहीं  की जा सकती।

प्र 27. एम.जी.एल. के अंतर्गत संज्ञेय और गैर-संज्ञेय अपराध क्या हैं?
उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 73 (4)में, यह प्रदान किया जाता है कि जहां कराधीन वस्तुओं और/या सेवाओं से संबंधित अपराधों में कर चोरी 2.5 करोड़ रुपये से अधिक हो जाती है, वह़ संज्ञेय और गैर-जमानती हो जाएंगे। अधिनियम के अंतर्गत अन्य अपराध के गैर-संज्ञेय और जमानती हैं।

प्र 28. एम.जी.एल. के अंतर्गत सक्षम अधिकारी कब सम्मन जारी कर सकते हैं?
उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 63 विधिवत सी.जी.एस.टी./एस.जी. एस.टी. के अधिकृत अधिकारी को यह अधिकार प्रदान करता है कि वे सम्मन जारी कर एक व्यक्ति को उपस्थित रहने के लिये बुलाएं जिससे वह व्यक्ति सम्मन जारी करने वाले व्यक्ति के समक्ष प्रस्तुत रहकर या तो साक्ष्य प्रस्तुत करे या दस्तावेज़ पेश करे या पूछताछ में कोई भी अन्य तथ्य रखे जो अधिकारी जानना चाहता है। दस्तावेजों या अन्य तत्वों को प्रस्तुत करने के लिए दिया सम्मन कुछ निर्दिष्ट दस्तावेजों या सामान प्रस्तुत करने के लिए है या सभी दस्तावेज़ों को प्रस्तुत करने या कुछ निश्चित विवरण के सामान जो सम्मन जारी किए गए व्यक्ति के कब्जे या नियंत्रण में हो सकते हैं।
प्र 29. जिस व्यक्ति को सम्मन भेजा गया है उसकी क्या जिम्मेदारियां हंै?
उत्तरः जिस व्यक्ति को सम्मन भेजा गया है वह या तो व्यक्तिगत रूप से या अपने प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित रहने के लिये कानूनी तौर पर बाध्य है और कथित सम्मन जारी करने वाले अधिकारी के समक्ष सत्य प्रकट करने के लिये बाध्य है जिसने किसी
विषय पर उसे सम्मन जारी किया है जो निरीक्षण का मामला है और उसे वे सब दस्तावेज़ और अन्य संबंधित सामग्री प्रस्तुत करनी होगी
जिसकी आवश्यकता हो सकती है।

प्र 30. सम्मन प्राप्त करने के बाद गैर-उपस्थिति के क्या परिणाम हो सकते हैं?
जिस अधिकारी ने सम्मन जारी किया है उस अधिकारी के समक्ष कार्यवाही एक न्यायिक कार्यवाही के समान मानी जाएगी। यदि एक व्यक्ति बिना उचित औचित्य के सम्मन पर दी गई तारीख पर उपस्थित नहीं होता, उसके विरूद्ध भारतीय दंड संहिता (आई.पी.सी.) की धारा 174 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सकता है। यदि वह सम्मन प्राप्त करने से बचने के लिए फरार हो जाता है, तब उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 172 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सकता है और इस मामले में यदि वह दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख/रिकार्ड नहीं प्रकट करता, उसपर भारतीय दंड संहिता की धारा 175 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सकता है। यदि किसी मामले में वह झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करता है, तब उसपर भारतीय दंड संहिता की धारा 193 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, अगर एक व्यक्ति सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टीअधिकारी के समक्ष पेश नहीं होता जिन्होंने उसे सम्मन जारी किया है, तब एम.जी.एल. की धारा 66(3)(डी) के अंतर्गत पच्चीस हजार रूपए तक के दंड के लिए उत्तरदायी होगा।

प्र 31. सम्मन जारी करने के लिए क्या दिशा निर्देश हैं?
उत्तरः वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के केन्द्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड (सी.बी.ई.सी.) ने समय-समय पर यह सुनिश्चित करने
के लिये दिशा-निर्देश जारी किये हैं कि सम्मन प्रावधानों का क्षेत्र/ फील्ड में दुरुपयोग नहीं किया जाए। इन दिशानिर्देशों के कुछ
महत्वपूर्ण मुख्य तथ्य यहां दिये जा रहे हैंः
पण् सम्मन अंतिम उपाय के रूप में जारी किए जाएं जहां निर्धारिती सहयोग नहीं कर रहे हैं और इस खंड का शीर्ष प्रबंधन के लिए प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए;
पपण् सम्मन की भाषा कठोर और कानूनी नहीं होनी चाहिये जो अनावश्यक मानसिक तनाव और प्राप्तकर्ता के लिये शर्मिंदगी का कारण बन जाए;
पपपण् अधीक्षकों द्वारा सम्मन सहायक आयुक्त और उसके उपर की रैंक के अधिकारियों की पूर्व लिखित अनुमति प्राप्त कर जारी किया जाना चाहिए और सम्मन में जारी करने का कारण लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए;
पअण् जहां परिचालन कारणों से, कथित अधिकारियों से पूर्व लिखित अनुमति प्राप्त करना संभव नहीं है, ऐसी स्थिति में मौखिक/टेलीफोन पर अनुमति लेकर उसे लिखित रूप में दर्ज करने के बाद कथित अधिकारी को यथाशीघ्र संभव समय पर तद्नुसार सूचित कर दें;
अण् सभी मामलों में, जहां सम्मन जारी किए जाते हैं, सम्मन जारी करने वाले अधिकारी को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करना चाहिए या मामले की फाइल में कार्यवाही का संक्षिप्त रिकॉर्ड, जिस अधिकारी ने सम्मन जारी करने की प्राधिकृति दी थी, उसे प्रस्तुत कर देनी चाहिए;
अपण् बड़ी कंपनियों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के वरिष्ठ प्रबंधन के अधिकारियों जैसे सीईओ, सीएफओ, महाप्रबंधकों को आमतौर पर पहली बार सम्मन जारी नहीं किया जाना चाहिए उन्हें तभी सम्मन जारी करने चाहिए जब जांच-प्रक्रिया में संकेत मिलता है कि निर्णय
लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी है जिसके कारण राजस्व की हानि हुई है।

प्र 32. सम्मन जारी करने के समय किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तरः आम तौर एक व्यक्ति को सम्मन देने से पहले निम्नलिखित सावधानियां अपनाई जानी चाहिएः –

पण् सम्मन उपस्थिति के लिये जारी नहीं किया जाना चाहिए जहां यह उचित नहीं है। सम्मन की शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब किसी जांच की कार्यवाही की जा रही है और उसमें व्यक्ति की उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती है।

पपण् आम तौर पर, सम्मन बारंबार जारी नहीं किये जाने चाहिए। जहाँ तक व्यावहारिक हो, आरोपी या गवाह का बयान कम से कम उपस्थितियों में दर्ज किया जाना चाहिए।

पपपण् सम्मन में दिए गए उपस्थिति के समय का सम्मान करें। किसी भी व्यक्ति को उसके बयान दर्ज करने से पहले ज्यादा देर तक प्रतीक्षा नहीं करवानी चाहिए सिवाय उस परिस्थिति को छोड़कर जब एक रणनीति के मामले के तहत जानबूझकर ऐसा करने का निर्णय लिया गया है।

पअण् प्राथमिकता के साथ, बयान कार्यालय समय के दौरान दर्ज किये जाने चाहिए हालांकि मामलों के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए बयान दर्ज करने के स्थान और समय के मामले में अपवाद किया जा सकता हैं।

प्र 33. क्या अधिकारियों का कोई ऐसा वर्ग है जो सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. अधिकारियों की सहायता के लिए आवश्यक हैं?
उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 65 के अंतर्गत, निम्न अधिकारियों सशक्त किया गया है और एम.जी.एल. निष्पादन के लिये इन्हें सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी. अधिकारियों की सहायता करना आवश्यक हंै। एम.जी.एल. में निर्दिष्ट की गई श्रेणियां निम्न प्रकार से हैंः
पण् पुलिस;
पपण् सीमा शुल्क;
पपपण् जी.एस.टी. कर संग्रह में संलग्न राज्य/केन्द्र सरकार के अधिकारी
पअण् भ् ाू-राजस्व के संग्रह में संलग्न राज्य/केन्द्र सरकार के अधिकारी
अण् सभी गांव के अधिकारी
अपण् अन्य कोई भी श्रेणी के अधिकारी जिन्हें केंद्र/राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।