वस्तु एवं सेवा कर (GST): इंटरनेट के माध्यम से व्यापार का संचालन (GST Electronic Commerce)

इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स

प्र 1. ई-कॉमर्स क्या है?

उत्तरः एमजीएल की धारा 43बी(डी) इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स को परिभाषित करती है जिसका अर्थ वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति की प्राप्ति, या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर मुख्य रूप से इंटरनेट के माध्यम से कोष या डाटा का प्रसारण, इंटरनेट का कोई अनुप्रयोग करते हुए जो मुख्य रूप से इंटरनेट पर निर्भर करता है, जैसे ई-मेल, तत्काल संदेश भेजना, शॉपिंग कार्ट, वेब सेवाएं, यूनिवर्सल डिस्कीप्शन डिस्कवरी और इंटग्रेशन (यू.डी.डी.आई.), फाइल ट्रांस्फर प्रोटोकॉल (एफ.टी.पी.) और इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज (ई.डी.आई.) तक सीमित नहीं है बेशक भुगतान आॅनलाइन किया गया है या नहीं किया गया है या चाहे आॅपरेटर द्वारा वस्तुओं और/या सेवाओं की अंतिम डिलीवरी पूरी कर ली गई है या नहीं।

 

प्र 2. ई-कॉमर्स ऑपरेटर कौन है?

उत्तरः एमजीएल की धारा 43बी(ई) इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स ऑपरेटर (ऑपरेटर) को प्रत्येक उस व्यक्ति के रूप में परिभाषित करती है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, इलेक्ट्रॉनिक मंच पर स्वामित्व, संचालन या प्रबंधन कर रहा है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति में संलग्न हैं। इसके अतिरिक्त इसमें ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं जो कोई भी जानकारी या इन वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से जुड़ी हुई अन्य सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक मंच के माध्यम से उपलब्ध कराते हैं उन पर ऑपरेटर के रूप में विचार किया जाएगा। एक व्यक्ति अपने स्वयं के खाते पर वस्तुओं/सेवाओं की आपूर्ति कर रहा है, हालांकि, उसे एक ऑपरेटर के रूप में नहीं माना जाएगा। उदाहरण के लिए, अमेज़ान और फ्लिपकार्ट ई-कॉमर्स ऑपरेटर हैं क्योंकि वे अपने मंच के माध्यम से वस्तुओं की आपूर्ति करने के लिए वास्तविक आपूर्तिकर्ताओं को सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं (आमतौर पर इसे मार्किट प्लेस माॅडल कहा जाता है) कर रहे हैं। हालांकि, टाइटन अपनी स्वयं की वेबसाइट के माध्यम से घड़ियों और आभूषणों की आपूर्ति करती है, इसलिये इस पर इन प्रयोजन के लिये एक ई-कॉमर्स के ऑपरेटर के रूप में विचार नहीं किया जाएगा। इसी तरह अमेज़ान और फ्लिपकार्ट को उन आपूर्तियों के लिये आॅपरेटर नहीं कहा जाएगा जो वे अपने स्वयं के खाते (आमतौर पर इसे इनवेंटरी मॉडल कहते हैं) के लिये करते हैं।

 

प्र 3. क्या ई-कॉमर्स ऑपरेटर के लिए पंजीकरण प्राप्त करना अनिवार्य है?

उत्तरः हाँ। एम.जी.एल. की धारा 19 आर/डब्ल्यू अनुसूची प्प्प्, यह प्रदान करती है कि ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के लिए सीमा रेखा छूट उपलब्ध नहीं है और वे आपूर्ति मूल्य का विचार किए बिना पंजीकृत कराने लिए उत्तरदायी हांेगे।

प्र 4. क्या ई-कॉमर्स ऑपरेटर के माध्यम से वस्तुओं/सेवाओं की आपूर्ति करने वाला आपूर्तिकर्ता सीमा में छूट पाने का हकदार होगा या नहीं?

उत्तरः नहीं। एम.जी.एल. की धारा 19 आर/डब्ल्यू अनुसूची प्प्प्, प्रदान करती है कि ऐसे आपूर्तिकर्ता को सीमा में छूट पाने की अनुमति नहीं है और वे आपूर्ति मूल्य की परवाह किए बिना पंजीकृत किये जाने के लिए उत्तरदायी होंगे।

प्र 5. एक एग्रीगेटर (समूहक) कौन है?

उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 43बी(ए) एक एग्रीगेटर को उस व्यक्ति के रूप में परिभाषित करती है, जो इलेक्ट्रॉनिक मंच का स्वामित्व और प्रबंधन करता है, और अनुप्रयोगों और संचार उपकरण के माध्यम से, संभावित ग्राहक को ब्रांड नाम या कथित एग्रीगेटर के टेªड नाम के अंतर्गत विशेष प्रकार की सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाता है और व्यक्तियों के मध्य एक विशेष प्रकार की सेवा प्रदान करने के लिये जोड़ने में सक्षम करता है। उदाहरण के लिए, ओला कैब एक एग्रीगेटर होगा।

प्र 6. क्या एक एग्रीगेटर को जी.एस.टी. के अंतर्गत पंजीकृत होना आवश्यक है?

उत्तरः हाँ। एम.जी.एल. की धारा 19 आर/डब्ल्यू अनुसूची प्प्प्, यह प्रदान करती है कि एग्रीगेटर्स के पास सीमा छूट उपलब्ध नहीं होगी और वे आपूर्ति के मूल्य की विचार किए बिना पंजीकृत करवाने के लिए उत्तरदायी हांेगे।

 

प्र 7. स्रोत पर कर संग्रह (टी.सी.एस.) क्या है?

उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 43सी(1) के अनुसार, ई-कॉमर्स ऑपरेटर को वस्तुओं या सेवाओं के वास्तविक आपूर्तिकर्ता को कथित आॅपरेटर के माध्यम से की गई वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के संबंध में प्रतिफल में से भुगतान की गई या देय भुगतान की राशि को एकत्र (अर्थात् घटाना) करना आवश्यक है। इस प्रकार जो राशि कटौती/एकत्र की जाती है उसे स्रोत पर कर संग्रह (टी.सी.एस.) के रूप में कहा जाता है।

प्र 8. किस समय/अंतराल पर ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा ऐसी कटौती की जानी चाहिए?

उत्तरः इस तरह के संग्रह/कटौती के लिए समय दो घटनाओं में होने वाली पहली घटना होगीः

;पद्ध वस्तुओं और सेवाओं के वास्तविक आपूर्तिकर्ता के खाते में जमा की गई किसी राशि का समय;

;पपद्ध कथित आपूर्तिकर्ता को नकद या अन्य किसी माध्यम से किये गये भुगतान का समय

 

 

प्र 9. ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा कितने समय के भीतर कथित टी.सी.एस. सरकार के खाते में प्रेषित किया जाना चाहिये? क्या ऑपरेटर को इस उद्देश्य के लिए कोई रिटर्न भरने की आवश्यकता है?

उत्तरः एम.जी.एल. की धारा 43सी(3) के अनुसार, ऑपरेटर द्वारा जिस महीने में उक्त राशि को एकत्र किया गया था उस महीने की समाप्ति 10 दिनों के भीतर उचित सरकार के उस खाते में जमा करने के लिये भुगतान की जानी चाहिये है जिसमें से वह एकत्र की गई थी। इसके अतिरिक्त, एम.जी.एल. की धारा 43सी(4) के अनुसार, ऑपरेटर को एक इलेक्ट्रॉनिक विवरण फाइल करना आवश्यक है, जिसमें उसके पोर्टल के माध्यम से की जावक आपूर्ति के लिए एकत्र की गई सारी राशियां सम्मिलित होंगी, उस कैलेंडर महीने की समाप्ति 10 दिनों के भीतर जिससे उक्त विवरण संबंधित हैं। कथित विवरणों में वास्तविक आपूर्तिकर्ताओं के नाम, उनके द्वारा की गई संबंधित आपूर्ति के विवरण और उनकी ओर से एकत्र की गई राशि शामिल होंगी। कथित विवरण का प्रारूप और विधि जीएसटी नियमों में निर्धारित की जाएगी।

 

प्र 10. इस टी.सी.एस. को जमा करने का दावा वास्तविक आपूर्तिकर्ता किस प्रकार कर सकते हैं?

उत्तरः ऐसे टी.सी.एस. जिन्हें ऑपरेटर द्वारा सरकारी खाते में जमा किया जाता है वे ऑपरेटर द्वारा दायर किये विवरण के आधार पर वास्तविक पंजीकृत आपूर्तिकर्ता (जिसके खाते में कथित राशि एकत्र की गई है) के नकद खाता बही में दर्शाये जाएंगे। और उन्हें वास्तविक आपूर्तिकर्ता द्वारा आपूर्ति के संबंध में कर दायित्व के निर्वहन के समय प्रयोग किया जा सकता है।

 

प्र 11. क्या ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा सरकार को जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक है?

उत्तरः हाँ। धारा 43सी(10) के अनुसार, एक अधिकारी जो संयुक्त

आयुक्त के पद से नीचे नहीं है ऑपरेटर द्वारा निम्न संबंधित विवरण प्रस्तुत करने हेतु आदेश कर सकता हैः

;पद्ध ऑपरेटर द्वारा किसी भी अवधि के दौरान वस्तुओं और सेवाओं की की गई आपूर्ति;

;पपद्ध वास्तविक आपूर्तिकर्ता द्वारा रखा गया माल जिसे कथित ऑपरेटर के माध्यम से आपूर्ति करने के लिये मालगोदाम या वेअरहाउस पर रखा गया था जो आॅपरेटर से संबंधित है और वास्तविक आपूर्तिकर्ता द्वारा अतिरिक्त व्यापारिक स्थान के रूप में पंजीकृत किया गया है। ऑपरेटर को 5 कार्य दिवसों के भीतर उपरोक्त जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक है जिस तारीख को उक्त जानकारी पूछे जाने का नोटिस दिया गया था। ऐसी जानकारी प्रस्तुत करने की विफलता के मामले में, जुर्माना 25,000 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

 

प्र 12. क्या ई-कॉमर्स ऑपरेटर को कोई विवरण प्रस्तुत करना आवष्यक है? वे कौन सी विस्तृत जानकारियां हैं जिन्हें विवरण में प्रस्तुत करना आवष्यक है?

उत्तरः हाँ, धारा 43सी(4) के अनुसार, प्रत्येक ऑपरेटर को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से, उसके माध्यम से की गई वस्तुओं और/या सेवाओं की जावक आपूर्तियों से संबंधित टीसीएस के रूप में एकत्र की गई सारी राशियों के विवरण उक्त कैलेंडर महीने की समाप्ति के बाद दस दिनों के भीतर प्रस्तुत करना आवश्यक है। विवरण में, अन्य बातों के साथ, आॅपरेटर द्वारा प्रत्येक आपूर्तिकर्ता की ओर से वस्तुओं और सेवाओं की जावक आपूर्तियों से संबंधित एकत्र की गई सारी राशियों के विवरण और कथित कैलेंडर महीने के दौरान की गई आपूर्तियों के विवरण शामिल करने होंगे।

 

प्र 13. ई-कॉमर्स के प्रावधानों में मिलान की अवधारणा क्या है और यह कैसे काम करती है?

उत्तरः धारा 43सी(6) के अनुसार, प्रत्येक आॅपरेटर द्वारा एक कैलेंडर महीने के दौरान की गई आपूर्ति के विवरण और एकत्रित राशि,और उसके विवरण की प्रस्तुति के साथ संबंधित आपूर्तिकर्ता द्वारा धारा 27 के अंतर्गत दायर किये वैध रिटर्न के साथ प्रस्तुत की गई जावक आपूर्ति के समरूपी विवरण उसी कैलेंडर महीने या उसके पूर्व कैलेंडर महीने के साथ मिलान किये जाएंगे। ऐसी स्थिति में जहां जावक आपूर्ति के विवरण, जिस पर आॅपरेटर द्वारा उसकी अपने विवरण में कर एकत्र करने की घोषणा की है आपूर्तिकर्ता की समरूपी घोषित विवरण से मिलान नहीं हो पाती तब ऐसी विसंगति को दोनो पक्षों/व्यक्तियों को सूचित कर दिया जाएगा।

 

प्र 14. यदि विवरण का मिलान नहीं हो पाता तब क्या होगा?

उत्तरः धारा 43सी(8) के अनुसार, भुगतान से संबंधित आपूर्ति का मूल्य जिसके संबंध में किसी विसंगति को सूचित किया गया है और आपूर्तिकर्ता द्वारा उसके वैध रिटर्न पर उस महीने जब विसंगति को सूचित किया गया था सुधार नहीं किया गया है तब इसे कथित आपूर्तिकर्ता के आउटपुट दायित्व में जोड़ दिया जाएगा, आगामी कैलेंडर महीने के लिये जिस कैलेंडर महीने में विसंगति को सूचित किया गया था। संबंधित आपूर्तिकर्ता, जिसके आउटपुट/उत्पादन कर देयता में किसी राशि को जोड़ दिया जाता है, तब वह ब्याज सहित इस तरह की पूर्ति के संबंध में देय कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, धारा 36 की उप-धारा (1) के अंतर्गत निर्दिष्ट दर पर उस राशि पर जब उसे ऐसी तारीख को देय भुगतान की तारीख पर जोड़ा गया था।