वस्तु एवं सेवा कर (GST) में अपील, समीक्षा और संशोधन (Appeals in GST)

प्र 1. कोई व्यक्ति किसी आदेश या उसके विरूद्ध पारित किये गये किसी फैसले से असंतुष्ट है क्या उसे अपील करने का अधिकार है?

उत्तरः हाँ। कोई भी व्यक्ति जो किसी आदेश या विरूद्ध पारित किये गये किसी फैसले से असंतुष्ट है उसे अपील करने का अधिकार है। ऐसा आदेश या निर्णय ‘निर्णय देने वाले प्राधिकारी‘ द्वारा पारित किये जाने चाहिए।

हालांकि, कुछ निर्णय या आदेश (धारा 93 में प्रदान किये अनुसार) अपील करने योग्य नहीं हैं।

प्र 2. जब सी.जी.एस.टी. का आयुक्त ऐसा महसूस करता है कि पारित किया गया आदेश, कानूनी और उचित नहीं है, क्या वह स्वयं आदेश को संशोधित कर सकता है?

उत्तरः नहीं। सी.जी.एस.टी. के आयुक्त आदेश को संशोधित नहीं कर सकता। मॉडल कानून में, सी.जी.एस.टी. और एस.जी.एस.टी. के लिए, वहाँ इस संबंध में अलग-अलग प्रावधान हैं। सी.जी.एस.टी. के लिए, धारा 79 (2) के अनुसार, सी.जी.एस.टी. आयुक्त यदि यह पाता है कि एक आदेश या निर्णय (एक निर्णायक प्राधिकरण द्वारा पारित) कानूनी या उचित नहीं है, वह न्यायिक निर्णय के लिये कुछ मुद्दे स्थापित करने के लिये आदेश पारित कर सकता है जहां उसे ऐसा लगता है कि आदेश कानूनी और उचित नहीं है और अधीनस्थ जीएसटी अधिकारी को प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (एफ.ए.ए.) के समक्ष एक आवेदन दाखिल करने के निर्देश दे सकता है। ऐसे आवेदन को फिर एफएए द्वारा इस प्रकार से निपटान किया जाएगा जिस रूप में एक अपील के साथ किया जाता है।

 

प्र 3. प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दाखिल करने की क्या समय सीमा है?

उत्तरः समय सीमा आदेश और फैसला सूचित करने के 3 महीने तय की गई है।

 

प्र 4. क्या यह समय सीमा सी.जी.एस.टी. आयुक्त के आदेश के फलस्वरूप भी विभागीय अपील/आवेदन दायर करने पर भी लागू होती है?

उत्तरः हां। यह उन आवेदनों पर भी लागू होती है जिन्हें अपील के रूप में निपटा जाना चाहिए और अपील के सभी प्रावधान ऐसे आवेदनों पर भी लागू होते हैं।

 

प्र 5. क्या प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील दायर करने में देरी को अनदेखा करने की शक्तियां हंै?

उत्तरः हाँ। अपील का आवेदन दायर करने के लिये वह निर्धारित 3 महीने की अवधि के अंत से एक महीने तक देरी को अनदेखा कर सकता है, बशर्ते धारा 79(4) के प्रावधान के अनुसार ”पर्याप्त कारण” निर्धारित किये जाने चाहिये।

प्र 6. क्या प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील ज्ञापन में निर्दिष्ट नहीं किये अतिरिक्त आधार की अनुमति देने के लिए कोई षक्ति है या नहीं?

उत्तरः हाँ। उसके पास अतिरिक्त आधार के लिये अनुमति प्रदान करने की शक्तियां हैं, यदि वह संतुष्ट हो जाता है कि चूक जानबूझकर नहीं की गई या अनुचित नहीं थी।

प्र 7. प्रथम अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश किसे सूचित किया जाना चाहिये?

उत्तरः प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को सी.जी.एस.टी. और एस.जी.एस.टी. क्षेत्राधिकार के आयुक्त को एक प्रति के साथ अपील करने वाले आवेदक और न्यायिक प्राधिकारी को आदेश की प्रति संचारित करनी होगी।

प्र 8. प्रत्येक अपील के साथ अनिवार्य पूर्व जमा की क्या राशि है जिसे अपील के साथ जमा करना आवश्यक है?

उत्तरः विवाद की 10 प्रतिशत राशि (हालांकि वहाँ अतिरिक्त प्रावधान हंै जिसके लिये मॉडल कानून को संदर्भित किया जा सकता है, प्रश्न 12 और 13 देखें) ।

 

प्र 9. विवादित राशि क्या है ;।उवनदज पद कपेचनजमद्ध?

उत्तरः एमजीएल की धारा 79(6) के स्पष्टीकरण के अनुसार, ‘विवादित राशि‘ की अभिव्यक्ति में निम्न शामिल हांेगे – ;पद्ध धारा 46 या 47 या 48 या 51 के अंतर्गत निर्धारित राशि;

;पपद्ध जीएसटी क्रेडिट नियम 201….., के नियम ………….. के अंतर्गत देय राशि; और

;पपपद्ध शुल्क लगाई गई राशि या लगाया गया जुर्माना ।

 

प्र 10. क्या एक अपील में एफ.ए.ए. आदेश पारित कर शुल्क की राशि/जुर्माने/दंड को बढ़ाया जा सकता है और प्रतिदाय/मूल प्राधिकारी द्वारा पारित प्रतिदाय/आई.टी.सी. को कम किया जा सकता है?

उत्तरः एफएए को जब्ती के बदले शुल्क या दंड या जुर्माने की राशि को बढ़ाने या इनपुट कर क्रेडिट की रकम को कम करने के आदेश पारित करने के लिये सशक्त किया गया है बशर्ते कि अपील करने वाले व्यक्ति को प्रस्तावित हानिकारक आदेश के विरूद्ध कारण बताओ प्रकटीकरण का उचित अवसर दिया गया है। (धारा 79(10)

का पहला प्रावधान)। जहां तक कि शुल्क बढ़ाने या आई.टी.सी. के गलत निर्णय लेने का 158 संबंध है, एफ.ए.ए. केवल प्रस्तावित आदेश के विरूद्ध अपील करने वाले व्यक्ति को एक विशिष्ट एससीएन देने के बाद ऐसा कर सकता है और वह आदेश धारा 51 के अंतर्गत उल्लिखित निर्धारित समय सीमा के भीतर पारित किया जाना चाहिए (धारा 79(10) का दूसरा प्रावधान)।

 

प्र 11. (केवल एस.जी.एस.टी. कानून के लिए) एस.जी.एस.टी. के अंतर्गत प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर करने के लिए अपील दायर करने से पहले अग्रिम-जमा के संबंध में क्या प्रावधान हैं?

उत्तरः अपील दायर करने से पहले विवाद की राशि का 10 प्रतिशत भुगतान जमा करना होगा। यह सी.जी.एस.टी. और एस.जी.एस.टीदोनों के लिए सामान्य है। हालांकि, एस.जी.एस.टी. के लिए, इस 10 प्रतिशत के अतिरिक्त, अपील करने वाले व्यक्ति द्वारा ”कथित गलत‘‘ आदेश से उत्पन्न होने वाले कर, ब्याज, जुर्माने और दंड का सारा भुगतान भी करना होगा, जिस रूप में उसने स्वीकार किया है” इसके अतिरिक्त, यदि एस.जी.एस.टी. आयुक्त किसी मामले को ”गंभीर मामला” समझते हंै, विभागीय प्राधिकरण प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को विवाद में अग्रिम-जमा की राशि को विवादित राशि के अधिकतम 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिये आवेदन कर सकते हैं।

 

प्र 12. (केवल एस.जी.एस.टी. कानून के लिए) ‘गंभीर मामले‘ का क्या अर्थ है?

उत्तरः इसे ऐसे मामले के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें 25 करोड़ रूपये की विवादित कर देयता शामिल है और जिसमें -एस.जी.एस.टी. के आयुक्त की राय (कारणों के लिए लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए) है कि विभाग के समक्ष करदाता के विरूद्ध अच्छा-खासा मामला है।

 

प्र 13. क्या एस.जी.एस.टी. आयुक्त अधिनियम के अंतर्गत अपने अधीनस्थ द्वारा पारित किसी भी आदेश को संशोधित कर सकते हैं?

उत्तरः हाँ। एस.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 80(1) आयुक्त को अधिकृत करती है कि वह अपने अधीनस्थ द्वारा पारित किसी आदेश की मांग और निरीक्षण करे और यदि किसी मामले में उसे लगता है कि निचले प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश त्रुटिपूर्ण है और राजस्व के लिये प्रतिकूल है, वह नोटिस प्राप्तकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के बाद आदेश को संशोधित कर सकता है।

 

प्र 14. क्या एस.जी.एस.टी. आयुक्त कथित संशोधन के लंबित रहने तक अपने अधिनस्थ द्वारा पारित किसी आदेश पर रोक लगा सकता है?

उत्तरः हाँ।

 

प्र 15. क्या एस.जी.एस.टी. के अंतर्गत अधीनस्थ द्वारा पारित किसी आदेश के संशोधन करने के लिये आयुक्त की शक्तियों पर कोई रोकटोक है?

उत्तरः हाँ, आयुक्त निम्न किसी भी क्रम में संशोधन नहीं करेगा यदिः

(क) आदेश धारा 79 या धारा 82 या 87 या 88 के अंतर्गत अपील के अधीन है; या

(ख) निर्णय पारित करने के या आदेश संशोधित करने की मांग के पश्चात तीन साल की अवधि समाप्त हो गई है। इनमें से कुछ विवरणों और अन्य ‘रूकावट’ के लिए, कृपया एमडीएल की धारा 80 देखें

 

प्र 16. न्यायाधिकरण के पास अपील अस्वीकार करने के लिए कब शक्तियों हांेगी?

160 उत्तरः ऐसे मामलों में जहां अपील शामिल है –

 कर राशि या

 इनपुट कर क्रेडिट या

 कर में अंतर या

 इनपुट कर क्रेडिट में फर्क है या

 जुर्माने की राशि,

 शुल्क की राशि या

 दंड की राशि का आदेश

रूपये 1,00,000/- से कम है, न्यायाधिकरण के पास कथित अपील को अस्वीकार करने की स्वेच्छा है। (एम.जी.एल. की धारा 82(2))

 

प्र 17. किस समय सीमा के भीतर न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दायर की जानी चाहिये?

उत्तरः अपील के विरूद्ध आदेश की प्राप्ति की तारीख से 3 महीने के भीतर।

 

प्र 18. क्या न्यायाधिकरण तीन महीने के बाद उसके समक्ष अपील दायर करने पर रोक लगा सकती है? यदि ऐसा है तब वह क्या समय होगा?

उत्तरः हाँ न्यायाधिकरण के पास तीन महीने के बाद किसी भी समयावधि के लिये रोक लगाने की शक्तियां उपलब्ध हैं बशर्ते अपीलकर्ता द्वारा कथित देरी करने के लिये प्रर्याप्त मामला प्रकट किया गया है।

 

प्र 19. न्यायाधिकरण के समक्ष आपत्तियों के विरूद्ध ज्ञापन दायर ;डमउवतंदकनउ व िबतवेे वइरमबजपवदेद्ध करने की क्या समय सीमा है?

उत्तरः अपील की प्राप्ति की तारीख से 45 दिनों के भीतर।

 

प्र 20. सी.जी.एस.टी. व एस.जी.एस.टी. के अंतर्गत अपील प्रावधानों (न्यायाधिकरण को) में अंतर को प्रकट करें।

;पद्ध एस.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 82 के अंतर्गत प्रावधानों में कोई भी व्यक्ति जो प्रथम अपीलीय प्राधिकारी द्वारा उसके खिलाफ लिए आदेश या निर्णय पारित करने के कारण पीड़ित है यह सी.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 82 में निहित प्रावधानों के समान हैं और उन पर अनिवार्य रूप से लागू होंगे और उसमें किए गए विचार-विमर्श धारा 82 में निहित प्रावधानों के समान रूप से लागू होंगे।

;पपद्ध एस.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 82 के उपरोक्त प्रावधान के अतिरिक्त भी अपीलीय न्यायाधिकरण को आयुक्त द्वारा पारित संशोधित आदेश भी शामिल किया गया है।

;पपपद्ध हालांकि राजस्व द्वारा प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के विरूद्ध अपील से संबंधित प्रावधानों को जैसा कि सी.जी.एस.टी. अधिनियम में दिया गया है उस रूप में एस.जी.एस.टी. अधिनियम में प्रदान नहीं किया गया है जबकि एस.जी.एस.टी. आयुक्त को संशोधन करने की शक्तियां प्रदत्त की गई हैं।

;अद्ध इसके अतिरिक्त, एस.जी.एस.टी. अधिनियम के अंतर्गत पीड़ित व्यक्ति को विवादित आदेश से उत्पन्न स्वीकार्य कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क और दंड का सारा भुगतान अग्रिम जमा के रूप में जमा करना होगा

 

प्र 21 क्या प्रतिदाय/रिफंड की अग्रिम-जमा राशि पर ब्याज देय है?

उत्तरः हाँ। एमजीएल की धारा 85 के अनुसार जहाँ अपीलकर्ता द्वारा धारा 82 की उपधारा (10)/(7) या धारा 79 की उपधारा (6)/(4) के अंतर्गत प्रथम अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के बाद, जमा राशि को वापस करने की आवश्यकता है, जैसा भी मामला हो सकता है, तब उस प्रतिदाय/रिफंड के संबंध में धारा 39 के अंतर्गत उस पर ब्याज उसके भुगतान करने की तारीख तक देय होगा।

 

प्र 22. न्यायाधिकरण के आदेश पर अपील किस मंच के लिए निहित है?

उत्तरः उच्च न्यायालय; यदि उच्च न्यायालय इस पर संतुष्ट हो जाता है कि ऐसी अपील में कानून की बड़ी प्राथमिकता शामिल है। (धारा 87(1))। हालांकि, यदि किसी मामले में न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश दो या दो से अधिक राज्यों, या किसी राज्य और केंद्र से संबंधित है, और उनके बीच लेन-देन के निपटान के संबंध में आपसी मतभेद हैं यानि अंतर-राज्य या राज्य के भीतर; या ऐसे मामले में जहां दो या दो से अधिक राज्यों, या राज्य और केंद्र के बीच; आपूर्ति के स्थान के बारे में विचारों का अंतर है, तब इस तरह के आदेश के विरूद्ध अपील सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जाएगी न कि उच्च न्यायालय में।

 

प्र 23. उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर करने की क्या समय सीमा है?

उत्तरः अपील के विरूद्ध आदेश की प्राप्ति की तारीख से 180 दिन के भीतर। हालांकि, उच्च न्यायालय के पास पर्याप्त कारण प्रकट करनेपर आगे देरी को अनदेखा करने की शक्ति प्राप्त है।