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February 26, 2016

केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) 2015-16 में बताया गया है कि वर्तमान सरकार के सत्‍ता में आने के बाद से विद्युत क्षेत्र में अनेक महत्‍वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। जो इस प्रकार हैं-
• उत्‍पादन क्षमता में अधिकतम अतिरिक्‍त बढोतरी हुई है। 2014-15 में 26.5 गीगावॉट की क्षमता के सृजन में अभी तक की सर्वाधिक बढ़ोतरी हुई है जो पिछले पांच वर्षों की लगभग 19 गीगावॉट की औसत वार्षिक परिवर्धन से कहीं अधिक है।

• विद्युत क्षेत्र में हुई क्षमता बढ़ोतरी अप्रत्‍याशित है। इन उपायों से भारत के शीर्ष बिजली घाटे को 2.4 प्रतिशत के कम स्‍तर पर लाने में मदद मिली है।

• विद्युत वितरण कंपनियों – उदय, उज्‍जवल, डिस्‍कॉम एश्‍योरेंस योजना के स्थिति और कार्य निष्‍पादन में सुधार लाने की व्‍यापक पहल की गई है। भारतीय रेल विद्युत खरीदने के लिए खुली पहुंच का बदलाव लाने का प्रयास कर रही है।

• नवीकरणों को प्रमुख नीति सहायता प्राप्‍त हुई है। 2022 तक लक्ष्‍यों को 32 गीगावॉट से 175 गीगावॉट तक संशोधित कर दिया गया है। राष्‍ट्रीय सौर मिशन के तहत नीलामियों के नवीनतम दौर में टैरिफ सर्वकालीन 4.34 रूपए/किलोवॉट तक पहुंच गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि इन प्रमुख सफलताओं होने के बावजूद विद्युत क्षेत्र की जटिलता है कि भयानक चुनौतियां बनी हुई हैं जो इस प्रकार हैं-

• टैरिफ अनुसूचियों की जटिलता इक्‍नॉमिक एक्‍टर्स को मूल्‍य संकेतों की ओर संतोषजनक रूप से जवाबदेह बनाने से रोकती हैं।

• कुछ मामलों में औसत टैरिफ आपूर्ति की गई बिजली की औसत लागत से भी कम निर्धारित की गई है।

• उच्‍च औद्योगिक टैरिफ एवं बिजली की परिवर्तनशील गुणवत्‍ता मेक इन इंडिया (Make in India) पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

• सार्वजनिक पहुंच के माध्‍यम से एकल राष्‍ट्रव्‍यापी विद्युत मूल्‍य तय करने के मार्ग में मूल्‍य और गैर-मूल्‍य अवरोधक है।

• घरेलू उपभोक्‍ताओं के लिए प्रगामी टैरिफ अनुसूचियों का निर्धारण।

• विद्युत टैरिफ अनुसूचियां वर्तमान में जटिल है। उदाहरण के लिए कुछ राज्‍यों में मुर्गीपालन, मत्‍स्‍य पालन, नम भूमि खेती (किसी निश्चित आकार से ऊपर और नीचे) मशरूम और खरगोश पालन आदि के लिए अलग-अलग टैरिफ हैं। इसके विरूद्ध अन्‍य ऊर्जा उत्‍पाद एकल मूल्‍य द्वारा अभिलक्षित किया गया है।

• उद्योग के लिए ऊंची टैरिफ होने से कंपनियां अपनी बिजली सृजन करने की विधि अपना सकते है। 47 प्रतिशत कंपनियां डीजल जनरेटर का उपयोग कर रहे हैं। 2006-07 और 2014-15 के बीच यूटिलिटी से बिजली की खरीदारी 4.6 प्रतिशत वार्षिकी बढ़ोतरी हुई है।

• जलवायु परिवर्तन पहल के लिहाज से वर्ष 2015 भारत के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण

• ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में श्रमशक्ति भागीदारी दर अधिक, पुरुषों की भागीदारी महिलाओं की तुलना में ज्‍यादा : आर्थिक सर्वे

• भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को पर्याप्‍त, ‘अच्‍छे’ सुरक्षित उत्‍पादक वेतन वाले रोजगार जुटाने की जरूरत है

• उर्वरक क्षेत्र के पैकेज में सुधार

• चक्रव्यूह की चुनौतीः प्रवेश करना आसान, बाहर निकलने में अवरोध

• भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी वैश्विक सुस्ती का सामना करने में सक्षम, भारत के लिए बहुपक्षीय संस्थानों का नजरिया सकारात्मक

• कृषि में बागवानी उत्पादन की प्रतिशत भागीदारी 33% से अधिक

• भारत ने26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि विश्व में दुग्ध उत्पादन 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा

• दुग्ध उत्पादन में भारत पहले पायदान पर, विश्व के दुग्ध उत्पादन में इसका योगदान5 प्रतिशत

• अप्रैल-जनवरी, 2015-16 में व्यापार घाटा घटकर8 बिलियन अमरीकी डॉलर हुआ जो 2014-15 की इसी अवधि के दौरान 119.6 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा था

• सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों से ढांचागत क्षेत्र में व्यापक बदलावों को मदद मिलेगी, इनका परिणाम उच्च आर्थिक विकास अर्जित करने व कायम रखने में सहायक

• भारतीय अर्थव्यवस्था वृह्द आर्थिक स्थिरता, गतिशीलता एवं आशा के केन्द्र के रूप में उभरी है और आगामी वर्ष में जीडीपी विकास दर0 प्रतिशत से 7.75 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद है। समीक्षा में अगले दो वर्षों में विकास दर 8 प्रतिशत से भी अधिक रहने का अनुमान है

• पिछले दो वर्षों के दौरान विद्युत क्षेत्र में उल्‍लेखनीय प्रगति हुई, रिकॉर्ड उत्‍पादन क्षमता जोड़ी गई, विद्युत में एकल बाजार, डिस्‍कॉम के सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास की दिशा में कदम उठाए गए

• आधुनिक वैश्विक कर इति‍हास में जीएसटी असाधारण सुधार उपाय होगा

• आर्थिक समीक्षा का मानना है कि 2015-16 के लिए9 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा लक्ष्‍य अर्जि‍त किया जाना संभव है

• किसानों के लिए स्‍थाई आजीविका और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में व्‍यापक बदलाव की जरूरत हैआर्थिक समीक्षा के अनुसार कृषि में उत्‍पादकता बढ़ाने पर बल

• FTA से आयात एवं निर्यात में बढ़ोतरी हुई

• सेवा क्षेत्र अब भी आर्थिक विकास का अहम वाहक, वर्ष 2015-16 में योगदान लगभग1 प्रतिशत रहा

• अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक माहौल में निराशा के बीच भारत स्थायित्व के केन्द्र के रूप में खड़ा है 2015-16 में जीडीपी विकास दर का दायरा 7 से75 रहने की उम्मीद