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केंद्रीय बजट 2016-17 में आभूषणों (Jewellery) पर 1% (बिना Cenvat Credit) और 12.5% (Cenvat Credit के साथ) उत्‍पाद शुल्‍क (Excise Duty) लगाया गया है। इस नाममात्र के Excise Duty पर भी निर्माताओं को Cenvat Credit of input services लेने की अनुमति होगी। इसका उपयोग आभूषणों पर Excise Duty के भुगतान के दौरान किया जा सकता है।

इस लेवी के बारे में आभूषण trade and industry ने कुछ आशंकाएं व्‍यक्‍त किए हैं। उस संदर्भ में लगाए गए इस Excise Duty के मुख्‍य बिन्दुओं की व्‍याख्‍या इस तरह है:-

• Registration के प्रावधानों को आसानी से online लागू करने, Excise Duty के भुगतान और रिटर्न भरने और विभागीय अधिकारियों के जीरो हस्‍तक्षेप।

• केन्‍द्रीय आबकारी अधिकारियों (central excise officers) को निर्देश दिया गया है कि वे निर्माताओं के परिसर (Factory और Showroom) का दौरा न करें।

• चांदी के आभूषणों पर (other than those studded with diamonds, ruby, emerald or sapphire) यह Excise Duty नहीं लगेगी।

• शिल्‍पकारों, स्‍वर्णकारों जो जॉब वर्क के आधार पर आभूषण निर्माण में लगे हैं उन्‍हें केन्‍द्रीय आबकारी विभाग में न तो Registration कराने, न ही Excise Duty देने और न ही रिटर्न भरने की जरूरत होगी। ये सारी जिम्‍मेदारियां प्रधान निर्माताओं को पूरी करनी होगी। [Rule 12AA of the Central Excise Rules, 2002]

• एक साल में लघु उद्योग उत्‍पाद शुल्‍क छूट (SSI) सीमा को Rs.6 करोड़ रखा गया है। यह सामान्‍य तौर पर SSI छूट Rs.1.5 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है। इसके साथ ही Rs.12 करोड़ की उच्‍च पात्रता सीमा का भी प्रावधान किया गया है। पहले यह सीमा Rs.4 करोड़ की थी।

• इस तरह अगर निर्माता का वित्‍तीय वर्ष में Rs.12 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है तब उसे यह Excise Duty देना होगा। वैसे निर्माता जिनका कारोबार Rs.12 करोड़ से कम है वे अगले वर्ष Rs.6 करेाड़ तक छूट प्राप्‍त करने के पात्र होंगे। ऐसे छोटे निर्माता मार्च 2016 में Rs. 50 लाख तक छूट प्राप्‍त करने के पात्र होंगे।

• मार्च 2016 या वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के लिए SSI छूट प्राप्‍त करने के लिए निर्माताओं को चार्टेड एकाउंटेट से 2014-15 और 2015-16 के एकाउंट बुक के आधार पर जारी प्रमाण पत्र देना होगा।

• इसके साथ ही वैकल्पिक केंद्रीकृत Registration की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसका अर्थ है कि निर्माताओं को अपने अलग-अलग निर्माण परिसरों के लिए अलग से पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।

• अधिकारियों को परेशानी रहित Registration करने के निर्देश दिए गए हैं। Registration के आवेदन करने के दो कामकाज के दिन के भीतर Registration करना होगा। इसके अलावा Registration के बाद परिसरों का verification नहीं किया जाएगा [Online Registration – https://www.aces.gov.in/].

• आभूषण निर्माताओं के निजी रिकॉर्ड या राज्‍य के वैट रिकॉर्ड या मानक ब्‍यूरो के रिकॉर्ड (हॉलमार्क जेवरातों के मामले में) सभी केन्‍द्रीय आबकारी उद्देश्‍यों के लिए मान्‍य होंगे। किसी jurisdictional central excise authorities के समक्ष अलग से स्‍टॉक की घोषणा नहीं करनी होगी।

• Excise Duty का भुगतान हर महीने करना होगा न कि प्रत्‍येक निकासी पर। मार्च, 2016 के लिए Excise Duty की पहली किस्‍त 31 मार्च 2016 को भुगतान करनी होगी।

• Excise Duty देने वाले आभूषण निर्माताओं के लिए सरलीकृत तिमाही रिटर्न भरने का provision किया गया है। (ER-8)

• छूट प्राप्‍त इकाइयों [Part III of chapter 7 of CBEC’s Central Excise Manual] के लिए सरलीकृत निर्यात प्रक्रिया भी उपलब्‍ध है।

Union Budget 2016-17